फतेहपुर। मौसम की बेरुखी से आलू, तिलहन फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पाला से आलू की फसल प्रभावित होने के बाद अब बदले मौसम से राई, सरसों और अरहर की फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। झुलसा, माहूृ व फफूंदनाशी रोग का प्रकोप फसलों की सेहत बिगाड़ रहा है।
रबी सीजन में जिले में गेहूं के अलावा मुख्य फसल के रूप में आलू, राई, सरसों, मटर व अरहर की बोआई किसान करते हैं। इस वर्ष मटर 2243 हेक्टेयर, सरसों 17900 हेक्टेयर व आलू 1100 हेक्टेयर में बोई गई है।
करीब एक सप्ताह पहले से पारा गिर रहा है। इससे करीब 20 प्रतिशत आलू की फसल पाला की चपेट में आ गईं। दो दिन से आसमान में बादल छाए हुए हैं और रविवार की रात हल्की बारिश हुई।
अब राई, सरसों की फसलों में माहू कीट के आसार बढ़ गए हैं। कृषि वैज्ञानिक नौशाद आलम ने कहा कि 22 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान तिलहन व दलहन फसलों के लिए काफी अच्छा होता है।
आसमान में बादल आने से तिलहन की फसलों में कीट लगने के आसार बढ़ जाते हैं। चार से पांच दिन बादलयुक्त मौसम जारी रहा तो आलू में झुलसा रोग और तेजी से फैलेगा। राई, सरसों में माहू व अरहर में फलीछेदक कीट का प्रकोप बढ़ेगा।
कृषि रक्षा अधिकारी सत्येंद्र सिंह का कहना है कि मौसम में लगातार हो रहे बदलाव से आलू व दलहनी फसलों की उत्पादकता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। रबी दलहन व तिलहन फसलों में खरपतवार नियंत्रण करना अति आवश्यक है।
आलू व राई, सरसों फसल को पाले से बचाने के लिए खेत में नमी रखें। यदि आलू, सरसों व मटर में किसानों को झुलसा का प्रकोप दिखे तो तत्काल उपचार करें।
रीडोमिल एमजेड का दो ग्राम प्रति लीटर घोल बनाकर प्रति बीघा फसल में छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा डाईथेनम-45 का छिड़काव कर फसल को रोग मुक्त किया जा सकता है। खेत के आसपास धुआं करने से भी पाले से फसलों को बचाया जा सकता है।
मलांव गांव के किसान ज्ञानप्रकाश मौर्य कहते हैं कि मौसम के बदले मिजाज से गेहूं की फसल को फायदा है, लेकिन आलू व सरसों की फसल बर्बाद हो जाएगी। शिवपुर गांव के किसान रामेश्वर लोधी कहते हैं कि आलू की फसल पर झुलसा का प्रकोप दिखने लगा है। वैज्ञानिकों से सलाह लेकर कीटनाशकों का छिड़काव किया गया है।
जिले में रबी में बोई गई फसलों का क्षेत्रफल
फसल का नाम क्षेत्रफल हेक्टेयर में
गेहूूं 178990
जौ 1869
चना 26842
मटर 2243
राई/सरसों 17936
मसूर 1054
अलसी 189
अरहर 11345
आलू 1100
मलांव गांव के किसान सूर्यकरन लोधी ने कहा कि मटर की फसल में कीट का प्रकोप है। कीटनाशक का दो बार छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन कीट खत्म नहीं हुए हैं। मटर में फूल व फली लगने पर यह कीट चट कर देते हैं।
अजईपुर गांव के किसान लाल बहादुर ने बताया कि सरसों की फसल में माहू से बचाने के लिए दवा का छिड़काव कर चुके है, लेकिन कीट फिर दिखाई देने लगा है। कृषि विशेषज्ञों से सलाह करके फिर से कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ेगा।
किसान रामेश्वर लोधी ने कहा कि आलू में झुलसा का असर दिखने लगा है। एक बार कीटनाशक का छिड़काव कर चुके हैं। मौसम के उतार-चढ़ाव से फिर से भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगे हैं। अब दोबारा कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ेगा।
सरसों के पौधे में माहू का प्रकोप बढ़ गया है। फूल निकल चुके हैं और फली बनने का यह समय है। अगर ऐसे में कीट का प्रकोप बढ़ा तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विभाग से जानकारी करके दवा का छिड़काव कर रहे हैं।