ज्वालागंज बस स्टाप पर अपने गंतव्य पर जाने के लिए सवार होते यात्री
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फतेहपुर। लॉकडाउन-3 में ग्रीन जिलों में दौड़ने के लिए रोडवेज बसें तो चला दी गईं लेकिन उनका खर्च ही नहीं निकल रहा है। तीन-चार सवारियां बैठाकर चालकों को डीजल फूंकना पड़ रहा है। मंगलवार जैसी स्थिति बुधवार को भी देखने को मिली। एआरएम का कहना है कि यही हाल रहा तो बसों को खड़ा करना पड़ जाएगा।
शासन ने 52 सीटर बस में 26 सवारी लेकर चलने की इजाजत दी है। इसमें परिचालक भी शामिल हैं। फतेहपुर डिपो ने जनपद के विभिन्न रूट, साथ ही चित्रकूट में बस भेजनी शुरू कर दी है। संचालन के दूसरे दिन 14 बसों को उतारा गया। यह दीगर रहा कि एक भी बस इन दो दिन में भरी नहीं देखी जा सकी।
खजुहा से बस लेकर आए चालक हरिश्चंद्र ने बताया कि उन्हें रास्ते भर में सिर्फ तीन सवारी ही मिली। चौडगरा तक एक भी सवारी नहीं मिली। उन्हें 18 किलोमीटर खाली गाड़ी दौड़ानी पड़ी। चौडगरा में दो सवारी थोड़ा आगे चलने पर तीसरी सवारी ने हाथ दिया। दोपहर एक बजे रोडवेज बस स्टाप में सवारी के नाम पर गिने चुने लोग दिखाई दिए।
करबिगवां निवासी आशीष औंग जाने के लिए बस का इंतजार करते दिखाई दिए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनके अतिरिक्त इस तरफ जाने को महज एक सवारी थी। एआरएम माखन लाल केशरवानी का कहना है कि दो दिन का रिस्पांस अच्छा नहीं रहा है। डीजल का खर्च नहीं निकल रहा है। वह दो दिन और देखेंगे। अगर ऐसा ही रहा तो बस का संचालन बंद करना मजबूरी हो जाएगा।
रेलबाजार में मोबाइल की दुकान पर लगी भीड़- फोटो : FATEHPUR