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जांच में सरवराकार की भूमिका पर उठे सवाल, भेजी गई रिपोर्ट

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असोथर क्षेत्र के भैरवा गांव में बने राम जानकी मंदिर के सरवराकार ने मंदिर को आय को निजी काम में इस्तेमाल किया है। न तो मंदिर के आय व्यय का सालों से ब्यौरा रखा और न ही मंदिर के रखरखाव में रकम खर्च की। अब तक की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है।
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दरअसल, ग्रामीणों ने जिलाधिकारी संजीव सिंह से कुछ समय पहले कमेटी गठित करने की मांग की थी। इस पर सदर उपजिलाधिकारी प्रमोद झा ने टीम बनाकर जांच कराई। टीम ने मंदिर के ट्रस्टी राम किशुन मौर्या से आय-व्यय का ब्यौरा मांगा तो वह ब्यौरा नहीं दे सके। ना तो मंदिर में रंगाई पुताई और ना कोई निर्माण होना पाया गया। एसडीएम ने बताया कि सरवाराकार ने राम जानकी मंदिर की जमीन से हुई आय को अपने निजी खर्च में लगा दिया। इनकी भूमिका सही नहीं मिली है। रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। उन्हीं के आदेश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि गांव निवासी भैरव प्रसाद ने राम जानकी मंदिर का निर्माण कराया था। भैरव प्रसाद की कोई संतान नहीं थी, जिस कारण उन्होंने अपनी जमीन राम जानकी मंदिर ट्रस्ट के नाम कर दी थी। 15 मई 1985 को गांव के ही रामकिशुन मौर्य को मंदिर का सरवराकार बना दिया था। भैरव प्रसाद की मृत्यु के बाद रामकिशुन राम जानकी मंदिर और मंदिर की 38 बीघा जमीन की देखरेख कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है 1985 से आज तक मंदिर में कोई कार्य नहीं कराया गया। मंदिर का गेट तक नहीं खोला जाता। गांव वाले पूजा भी नहीं कर पाते हैं। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने डीएम से की थी।
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