= चार्ज छोड़ने से एक दिन पहले 30 मई को बांट दिए गए थे नियुक्ति पत्र, तत्कालीन प्रभारी सीएमओ की भूमिका पर उठे सवाल
= बिना शासनादेश व विज्ञापन के ही वार्ड आया और स्वीपर के दस पदों पर हुई थी भर्ती, मामले की जांच शुरू होने से खलबली
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। स्वास्थ्य विभाग में वार्ड आया और स्वीपर पदों पर आउटसोर्सिंग से हुई भर्ती अब सवालों के घेरे में आ गई है। भर्ती से जुड़ी फाइल करीब दो माह तक गायब रही। फाइल मिलने के बाद जब दस्तावेज खंगाले गए तो भर्ती प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस भर्ती के लिए शासनादेश तक उपलब्ध नहीं था, उसमें नियुक्ति पत्र कैसे जारी कर दिए गए।
मामले में तत्कालीन प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि प्रभारी सीएमओ के चार्ज छोड़ने से ठीक एक दिन पहले 30 मई को अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित कर दिए गए थे। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर विभाग में सवाल उठने लगे।
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नौकरी के लिए ढाई-ढाई लाख रुपये देने का आरोप
नियुक्ति पाने वाले कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आउटसोर्सिंग के जरिए स्वीपर की नौकरी पाने के लिए एजेंसी को ढाई-ढाई लाख रुपये दिए थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का मामला और गंभीर हो सकता है।
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दो माह तक फाइल कहां रही, जांच का विषय
भर्ती से संबंधित फाइल करीब दो माह तक विभाग में नहीं मिल रही थी। फाइल मिलने के बाद अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच शुरू की तो शासनादेश और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई सवाल सामने आए। अब यह भी जांच का विषय है कि फाइल इतने समय तक कहां रही और उसे किसके स्तर से रोका गया।
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नियुक्ति पाने वालों के भविष्य पर संकट
बिना स्पष्ट शासनादेश के हुई भर्ती में नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के सामने भी असमंजस की स्थिति है। नौकरी मिलने के बाद परिवार के साथ खुशी बांटने वाले कर्मचारियों को अब नियुक्ति रद्द होने या कार्रवाई की चिंता सताने लगी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि भर्ती में गड़बड़ी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
ऐसे हुआ भर्ती में घपला
मई के प्रथम सप्ताह में बिना किसी शासनादेश और राष्ट्रीय अखबार में विज्ञापन के ही वार्ड आया के पांच और स्वीपर के पांच पदों पर गुपचुप तरीके से भर्ती कर दी गई। आरोप है कि एजेंसी के माध्यम से 10 लोगों को नियुक्त किया गया। भर्ती प्रक्रिया में न तो कोई लिखित परीक्षा कराई गई और न ही अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया गया। इसके बावजूद चयनित लोगों को नियुक्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। 30 अगस्त को नियुक्ति पत्र जारी कर इन कर्मचारियों की ज्वाइनिंग भी करा दी गई। भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता का अभाव सवालों के घेरे में है।
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मामले की जांच शुरू करा दी गई है। प्रकरण को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी डाल दिया गया है। जांच में भर्ती प्रक्रिया, शासनादेश, एजेंसी की भूमिका और नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। - उदयभान सिंह, सीएमओ