जिला पंचायत चुनाव में वोटरों ने अपनी ताकत दिखा दी।
कई दिग्गजों का दांव उल्टा पड़ा। सपा समर्थित 18 प्रत्याशी, भाजपा समर्थित
आठ प्रत्याशी और बसपा समर्थित दो प्रत्याशी अपनी सीटेें निकाल पाए। करीब 18
सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों के खाते में गई है।
बिंदकी तहसील की
चांदपुर, डिघरुवा व अमौली सीट से सपा व भाजपा के झंडे के साथ चुनाव लड़ने
वाले प्रत्याशियों को मुंह की खानी पड़ी। पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता
आदित्य पांडेय समर्थित प्रत्याशी राज बघेला चुनाव हार गए।
इसी प्रकार से
अमौली सीट से आदित्य को झटका लगा। इस सीट से बंटू सोनकर को हार का मुंह
देखना पड़ गया। सपा ने हालांकि समर्थित प्रत्याशी खड़ा नहीं किए, लेकिन सपा
के झंडे तले चुनाव लड़ा गया।
जहानाबाद विधायक मदन गोपाल वर्मा के आगे आने
के बावजूद चांदपुर सीट से सभाजीत कोरी जीतने में नाकामयाब रहे। यही स्थिति
अमौली ब्लाक से चुनाव लड़े रमेश दिवाकर की रही।
घाटमपुर विधायक एवं पूर्व
मंत्री इंद्रजीत कोरी के पुत्र विनोद कुमार भी डिघरुवा सीट से हार गए।
हालांकि देवमई सीट से सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव की पत्नी नीतू
यादव व मौहार सीट से सपा की राजनीति करने वाले डॉ. नरेंद्र सिंह फतह करने
में सफल रहे।
सदर तहसील रमवा-पंथुवा सीट से पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह
यादव की पत्नी विमलेश यादव ने चुनाव जीता। इसी प्रकार से बसपा के दर्जन भर
प्रत्याशियों में ज्यादातर को निराश होना पड़ गया।
बिंदकी तहसील की
बागबादशाही सीट से चुनाव लड़े बिंदकी विधायक सुखदेव प्रसाद वर्मा का भांजा
राजेश कुमार उर्फ राकेश बागबादशाही से चुनाव हार गए।
बसपा को खागा तहसील की
विजयीपुर व बुधवन सीट पर जीत नसीब हुई। इन सीटों पर बसपा समर्थित
प्रत्याशी राम प्रसाद मुन्ना व ऊषा देवी ने बाजी मारी।