बाहुबल के दम पर कई पंचवर्षीय से दो ब्लाकों में
प्रमुखी की कुर्सी पर राज करने वालों का सत्ता परिवर्तन हुआ है। सत्ता पलट
में अतिसंवेदनशील भिटौरा और हंसवा विकास खंड के परिणाम आए हैं। यहां पर
पिछले कई सालों से लंबी अपराधों की फेहरिस्त के बलबूते ब्लाक प्रमुख के पद
दबदबे से हथियाने वालों को करारी शिकस्त मिली है।
त्रिस्तरीय पंचायत
चुनाव में ब्लाक प्रमुख के दावेदारों में भिटौरा ब्लाक से राजेंद्र शुक्ला
की पत्नी कल्पना शुक्ला दावेदार रही हैं। उनके विरोधी रेनू सिंह पत्नी
महेंद्र सिंह से करारी हार मिली है। रेनू सिंह की चुनावी सियासत के पीछे का
मुखौटा लल्ली सिंह रही हैं। वह पहली बार मैदान में आई थी। लल्ली सिंह पर
भी करीब आधा दर्जन आपराधिक मामले हैं।
वहीं इनके विरोधी राजेंद्र शुक्ला पर
27 मुकदमे हैं। भिटौरा ब्लाक क्षेत्र में राजेंद्र शुक्ला परिवार में
प्रमुखी और प्रधानी तीन दशक से रही है। अभी भी हालात यह हैं कि कोई भी
क्षेत्र में राजेंद्र शुक्ला के खिलाफ जुबान नहीं खोलता है। तीन दशकों के
बनाए किले को लल्ली सिंह पक्ष ने ढहाया है।
इधर, हंसवा ब्लाक से सपा
प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार यादव निवासी रामपुर इमादपुर प्रमुख पद के हारे
प्रत्याशी हैं। इनके पीछे चुनावी बिसात बिछाने में माहिर पूर्व ब्लाक
प्रमुख इंद्रसेन यादव का हाथ था। डेढ़ दशक से यही परिवार प्रमुखी का मजा
लूट रहा था।
लेकिन इस बार पूर्व आनंद लोधी के भाई अमित लोधी इनके सामने
चुनौती बनकर सामने आए। बीडीसी सदस्यों ने भी नए चेहरे का मताधिकार से
स्वागत किया। हार का सामना करने वाले परिवार का क्षेत्र में अच्छा दखल और
रुतबा है। हारे प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार यादव के खिलाफ 13 अपराधिक मुकदमे
दर्ज हैं।