थरियांव में बूंदाबादी के बाद धान की फसल समेटते किसान।
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मौसम में अचानक आए बदलाव से किसानों की धड़कने तेज हो गई हैं। नवरात्र में हो रही बारिश से पकी धान की फसल पर खतरा मंडराने लगा है। शनिवार को कुछ क्षेत्रों में बूंदाबांदी तो कुछ में तेज बारिश हुई। शुरू होते ही किसान खेत में कटी धान की फसल को समेटने पहुंच गए। किसान राई, सरसों, आलू की बुआई भी नहीं कर पा रहे।
लगातार तीन साल प्रकृति की मार के बाद इस साल खरीफ की फसल किसान के खेतों में लहलहा रही है। कुछ प्रजाति के धान की फसल तैयार हो गई है। किसान फसलों की कटाई भी करा रहे हैं। जून से अब तक हुई बारिश फसलोें के लिए वरदान बनी रही। अब छिटपुट बारिश किसानों की चिंता बढ़ा रही है। अधिक बारिश होने पर पकी फसलों के खराब होने का खतरा भी मंडरा रहा है।
वैसे भी दो दिन पहले हुई बारिश के साथ तेज हवा से 20 फीसदी धान की फसल को नुकसान हुआ है। वहीं, अगेती आलू, मटर बोने वाले किसान पितृपक्ष से फसल बुआई की तैयारी करने लगते हैं। इस बार रुक-रुक कर होे रही बारिश से किसान अपने खेतों की जोताई तक नहीं कर पा रहे हैं। खेतों में बरसाती घास खड़ी है।
ऐसे में चना, आलू, मटर बुआई के लिए खेत तैयार करने में किसानों को चिंता में डाल रखा है। मलांव गांव के किसान सुरेंद्र पटेल ने बताया कि 10 बीघा मटर के फसल की बुआई करनी है। मौसम के उतार-चढा़व से अभी तक खेत की मिट्टी नहीं बन पाई है। नवरात्र से मटर की बुआई शुरू हो जानी चाहिए। किसान रामभवन लोधी ने बताया कि अगेती आलू का बीज कोल्ड स्टोर से निकाल कर घर में रख लिया है। बारिश से खेत की जोताई नहीं हो पा रही है। आलू के बीज में अंकुर निकलने लगे हैं।