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Fatehpur News: ग्लव्स की खपत पर उठे सवाल, मेडिकल कॉलेज मांग रहा हिसाब

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फतेहपुर। जिला अस्पताल में ग्लव्स की खपत को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सवाल खड़े किए हैं। महज पांच दिनों में करीब पांच हजार ग्लव्स की खपत सामने आने के बाद प्रशासन ने इसका पूरा हिसाब मांगना शुरू कर दिया है। इतनी अधिक खपत को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
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जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि ग्लव्स की गुणवत्ता खराब होने के कारण कई बार एक के ऊपर दूसरा ग्लव्स पहनकर काम करना पड़ता है। सामान्य गुणवत्ता वाले ग्लव्स जल्दी फट जाते हैं या उनकी सुरक्षा को लेकर भरोसा नहीं रहता। ऐसे में मरीजों की जांच और इलाज के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ को दोहरे ग्लव्स का इस्तेमाल करना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन पांच दिन में पांच हजार ग्लव्स की खपत को सामान्य नहीं मान रहा है। प्रशासन ने ग्लव्स के वितरण और इस्तेमाल का पूरा ब्योरा मांगा है। किन विभागों को कितने ग्लव्स उपलब्ध कराए गए और उनकी कितनी खपत हुई इसका मिलान किया जा रहा है। अस्पताल में ग्लव्स मरीजों की जांच, ड्रेसिंग, ऑपरेशन और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में नियमित रूप से इस्तेमाल होते हैं।
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ऐसे में पर्याप्त उपलब्धता के साथ उनकी गुणवत्ता भी बेहद महत्वपूर्ण है। डॉक्टरों का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण ग्लव्स उपलब्ध कराए जाएं तो दोहरे ग्लव्स इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और खपत भी कम हो सकती है।
अब प्रशासन की नजर पांच हजार ग्लव्स की खपत के वास्तविक कारणों पर है। यदि खराब गुणवत्ता के कारण खपत बढ़ी है तो आपूर्ति व्यवस्था और ग्लव्स की गुणवत्ता की जांच जरूरी होगी। वहीं कोई अन्य कारण सामने आने पर उसके आधार पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके मौर्य का कहना है कि यदि गुणवत्ता खराब है तो जांचकर कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही अस्पताल को ग्लव्स व अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।


जांच के बाद साफ होगी स्थिति
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से मांगे गए रिकॉर्ड से स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पांच दिनों में पांच हजार ग्लव्स की खपत किन परिस्थितियों में हुई। विभागवार खपत का ब्योरा सामने आने के बाद ही तय हो सकेगा कि अधिक खपत का कारण चिकित्सकीय जरूरत, ग्लव्स की खराब गुणवत्ता या वितरण व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या है।
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