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लॉकडाउन से टमाटर हुआ बदरंग 17-09-41

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चौडगरा। खेत में टमाटर पककर लाल हो गया है और लॉकडाउन ने टमाटर के भाव को बदरंग कर दिया है। थोक मंडियों में तीन से पांच रुपये किलो बिक रहा है। ऐसे में किसानों को टमाटर तुड़ाई की मजदूरी निकालना मुश्किल हो रहा है। इसकी एक वजह मंडियों के खुलने का समय घटाए जाना भी है। बाहर से आने वाले थोक के व्यापारी मंडियों में नहीं आ रहे हैं।
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मलवां ब्लाक के शाहजहांपुर, जलाला, मवइया के किसान टमाटर की खेती को व्यापारिक ढंग से करते हैं। पिछले साल लॉकडाउन में टमाटर के भाव इतने कम हो गए कि किसानों की सिंचाई की कीमत भी नहीं निकल पाई। पिछले साल के घाटे की भरपाई करने की उम्मीद से किसानों ने तेज धूप और गर्मी में मेहनत करके फसल तो तैयार कर ली, लेकिन इस बार फिर से लॉकडाउन लग गया। मंडियों में बाहरी व्यापारियों का आना कम हो गया और टमाटर के दाम एकदम से गिर गए। किसानों का कहना है कि नवंबर में टमाटर की फसल बोई थी। मार्च, अप्रैल से मंडियों में बिक्री करने लायक हो जाती है। इसी समय दो साल से लॉकडाउन लग रहा है।
शाहजहांपुर में रोज 700 कैरेट निकल रहे टमाटर
शाहजहांपुर गांव में रोज 700 कैरेट (25 किलो) टमाटर निकल रहा है। 500 से 600 रुपये कैरेट बिकने वाला टमाटर इस समय 30 से 50 रुपये किलो बिक रहा है। प्रयागराज, गोरखपुर, बिहार, बंगाल के व्यापारी किसानों से संपर्क करके खेत से टमाटर खरीदते थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से बाहरी व्यापारी नहीं आ रहे हैं।
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इन गांवों में होती है टमाटर की खेती व क्षेत्रफल
गांव का नाम--- क्षेत्रफल बीघा में
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शाहजहांपुर--- 400 बीघा
जलाला-- 150 बीघा
मवइया-- 50 बीघा
बनियन खेड़ा-- 100 बीघा
नामामऊ-- 80 बीघे
किसान भारत भूषण पाठक
शाहजहांपुर गांव के किसान भारत भूषण पाठक ने बताया कि 50 रुपये प्रति कैरेट से कम बिकने पर नुकसान होता है। एक बीघा में 1500 रुपये का बीज, 3000 रुपये की खाद, 1500 रुपये सिंचाई, 1000 रुपये जोताई, 2500 रुपये की कीटनाशक मिलाकर कुल लागत 9500 रुपये आती है। रेट कम होने के कारण बहुत से किसानों ने सिंचाई करना बंद कर दिए हैं।
श्रीमोहन पासवान
जलाला गांव के किसान किसान श्रीमोहन पासवान ने बताया कि बैंक से 10 हजार रुपये का कर्ज लेकर टमाटर की पांच बीघे फसल लगाई है। पहले तो लग रहा था कि इस बार सहालग होने से रेट अच्छे मिलेंगे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से टमाटर के रेट धाराशाही हो गए। अब टमाटर तुड़ाई की मजदूरी नहीं निकल रही है। बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे, इसकी चिंता सता रही है।
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