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लागत से कम में बिक रहा आलू, किसानों की बढ़ाई चिंता

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फोटो- 23- थरियांव के कोल्ड स्टोर में सन्नाटा। संवाद
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300 रुपये क्विंटल तक गिरे आलू के भाव
क्रासर
1100 रुपये तक में बिका आलू 800 रुपये क्विंटल पर पहुंचा
300 रुपये स्टोर का भाड़ा और पैदावार में आने वाला खर्च निकालना भी मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। बीते साल रसोई का बजट बिगाड़ने वाले आलू के भाव तेजी से गिरे हैं। थोक में प्रति क्विंटल 300 रुपये तक की गिरावट आई है। हालांकि इस गिरावट का लाभ आम लोगों को नहीं मिल रहा है। फुटकर बाजार में अभी भी आलू 20 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा है। किसानों का कहना है कि भाव गिरने से लागत भी नहीं निकल रही है।
पिछले साल आलू के दाम अधिक होने के कारण बुआई के समय किसानों को चार से साढ़े चार हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बीज खरीदना पड़ा था। जब आलू की खुदाई शुरू हुई तो बाजार भाव 600 से 800 रुपये क्विंटल रहे। ऐसे में महंगा बीज खरीद कर फसल तैयार करने वाले किसानों ने आलू का कोल्ड स्टोर स्टोर में भंडारण कर दिया। ऐसा यह सोचकर किया कि बाद में अधिक लाभ मिलेगा। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। एक हफ्ते पहले तक 1100 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकने वाला आलू अब 800 रुपये के भाव पर आ गया है।
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इनसेट
स्टोर संचालकों को भी सता रही चिंता
आलू के भाव कम होने से जहां किसानों को नुकसान हो रहा है, वहीं कोल्ड स्टोर संचालकों को भी चिंता सता रही है कि दो साल पहले की तरह स्टोर से आलू फेंकने की नौबत न आ जाए। इसलिए स्टोर संचालक अभी से किसानों को फोन करके मंडी में आलू बेचने की सलाह दे रहे हैं।
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जिले के 14 कोल्ड स्टोर में 88851 मीट्रिक टन है आलू
जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो आलू भंडारण के लिए 14 कोल्ड स्टोर हैं। इनमें 89016.70 मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुआ था। 165 मीट्रिक टन आलू की निकासी हो गई है। अब 88851.70 मीट्रिक टन आलू अभी स्टोर में भंडारित है।
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बोले आलू किसान...
फोटो- 24- दीपक दुबे
आलू किसान दीपक दुबे ने कहा कि आलू से इस बार खाद, बीज, डीजल और अन्य खर्च की लागत नहीं निकल रही है। जब आलू के फसल की खुदाई हो रही थी, उस समय आलू की कीमत छह से आठ सौ रुपये क्विंटल थी। अब भी उसी दाम में है और स्टोर का भाड़ा खर्च भी बढ़ गया है।
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फोटो- 25- उदय चौरसिया
आलू किसान उदय चौरसिया ने बताया कि आलू की बुआई के समय बीज चार हजार से साढ़े चार हजार रुपये प्रति क्विंटल खरीदा था। अब आलू बेचने का समय आया तो स्टोर में 800 रुपये तक ही बिक रहा है। बोरी, पल्लेदारी और स्टोर भाड़ा जोड़कर करीब 300 रुपये क्विंटल का खर्च आ रहा है।
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आलू में कितनी आई लागत... कितने मिल रहे भाव
प्रति बीघा आलू की बुआई में किसानों का पांच क्विंटल आलू का बीज लगता है। पिछले साल 4500 रुपये क्विंटल के हिसाब से बीज खरादा गया। यानी पांच क्विंटल बीज 22500 रुपये का होता है। एक बीघा खेत जोतकर बनाने में ढाई घंटे का समय लगता, जिसका 800 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से दो हजार रुपये खर्च होता है। डेढ़ बोरी डीएपी 1800 रुपये, पोटास 25 किलो 500 रुपये, यूरिया एक बोरी 300 रुपये और कीटनाशक, जिंक 1500 रुपये पर खर्च हुए थे। तीन सिंचाई में 1200 रुपये लगे। इतना खर्च करने के बाद करीब 40 क्विंटल आलू पैदा हुआ। 40 क्विंटल का स्टोर भाड़ा, बोरी, पल्लेदारी और मंडी खर्च करीब 350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 14000 रुपये होता है। आलू की कुल लागत 44800 रुपये पहुंच जाती है। 40 क्विंटल आलू 800 रुपये की दर से किसान बेचता है तो 32000 रुपये ही मिलते है। ऐसे में करीब 12 हजार रुपये प्रति बीघा किसानों को नुकसान हो रहा है।
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