फ़ोटो-19-ट्रैक्टर में बैठकर सफर करते ग्रामीण। संवाद
खागा। यमुना किनारे बसे करीब 25 गांवों की 30 हजार से अधिक आबादी बुनियादी परिवहन सुविधा के लिए संघर्ष कर रही है। इटरौड़ा, काशीपुर, थुरियानी, मिहुवापुर, बहियापुर, गुरवल, जलंधपुर, मड़ौली, मनीपुर, सेमरिया, विकौरा, नेवाजपुर, रमसगरा समेत कई गांवों तक आज भी कोई सरकारी बस नहीं पहुंची है। मजबूरी में लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली, ऑटो और अन्य डग्गामार से सफर करते हैं।
परिवहन संकट का सबसे अधिक असर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर पड़ रहा है। छात्र-छात्राओं को समय से विद्यालय और कॉलेज नहीं पहुंच पाने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो जाती है। मजदूरों और छोटे कारोबारियों की आजीविका पर भी इसका असर पड़ रहा है। महिलाओं को बैंक, तहसील और अस्पताल जैसे जरूरी कार्यों के लिए निजी वाहनों पर अधिक किराया देना पड़ता है।
अंजना गांव की छात्रा श्रीमती देवी ने बताया कि विद्यालय सुबह आठ बजे शुरू होता है लेकिन समय से पहुंचने के लिए उन्हें सुबह छह बजे ही साइकिल से आठ किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। जर्जर सड़क के कारण कई बार गिर चुकी हैं। इसके बाद भी निजी वाहन का इंतजार करना पड़ता है, जिससे अक्सर कक्षाएं छूट जाती हैं। शाम को कोचिंग से लौटते समय भी वाहन नहीं मिलने से पढ़ाई प्रभावित होती है।
मनीपुर-सेमरिया निवासी धर्मराज निषाद ने बताया कि पिछले महीने दादी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बाइक से किशनपुर ले जाना पड़ा। खराब सड़क के कारण आठ किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब डेढ़ घंटे लग गए। उनका कहना है कि सड़क अच्छी होती और सरकारी बस सेवा उपलब्ध रहती तो मरीजों को समय पर उपचार मिल सकता था।
मदद अलीपुर निवासी राम सिंह निषाद ने बताया कि बैंक, तहसील, अस्पताल या बाजार जाने के लिए ऑटो चालक खराब सड़क का हवाला देकर 100 से 200 रुपये तक किराया वसूलते हैं। सरकारी बस सेवा शुरू होने पर लोगों को राहत मिलेगी। तहसीलदार शैलजा कुमारी ने बताया कि समस्या से उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया जाएगा।