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दोहरे हत्याकांड के आरोपी धर्मराज की मौत का प्रमाण खोजने में जुटी पुलिस

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दोहरे हत्याकांड के आरोपी की मौत का प्रमाण खोज रही पुलिस
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फतेहपुर। आजीवन कारावास की सजा के बाद फरार तीन भाइयों में एक की मौत होने की प्रमाणिकता पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। पुलिस को कोर्ट में दाखिल मृत्यु प्रमाण पत्र की सत्यता साबित करने के निर्देश दिए हैं। फरार तीन भाइयो में से दो लोगों की संपत्ति कुर्क कराने के बाद तीसरे को लेकर पेच फंसा है।
पुलिस ने आजीवन कारावास के बाद हसवा ब्लाक के पूर्व उप ब्लाक प्रमुख चंद्रशेेखर तोमर के फरार भाइयों के घर में मंगलवार को कुर्की की थी। एक ही मकान में सभी भाइयों के परिवार रहते हैं। चार घंटे की कार्रवाई में पुलिस थरियांव थाना क्षेत्र के बरसरा गांव स्थित घर से घरेलू सामान उठा ले गई थी। 1982 में सगे भाइयों चेला व पूनी की 24 बीघा जमीन के लिए हत्या की गई थी।
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शवों को दफना दिया गया था। पुलिस की जांच में जमीन की वरासत घटना के कुछ माह बाद गांव के कुछ लोगों के नाम होने से सुराग लगा था। उसी आधार पर तत्कालीन थरियांव थानेदार रंगनाथ शुक्ल ने सूरजबली सिंह तोमर को पकड़ा था। सूरजबली ने दोनों की हत्या की बात कबूल की थी। उसने हत्याकांड में शामिल भाई कामता सिंह, धर्मराज सिंह के नाम भी बताए थे। ये तीनों चंद्रशेखर तोमर के भाई हैं। सेशन कोर्ट से तीनों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
कुछ साल बाद हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा हो गए थे। करीब एक साल पहले हाईकोर्ट में पीड़ित पक्ष की पैरवी की गई। कोर्ट ने सभी की जमानत खारिज कर आजीवन कारावास की सजा कायम रखी। पुलिस किसी को पकड़ नहीं पाई। तब कोर्ट ने संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए।
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इस पर सूरजबली और कामता की संपत्ति कुर्क हो गई। धर्मराज की संपत्ति कुर्क नहीं की गई। आरोपी पक्ष ने धर्मराज की मौत का प्रमाण पत्र कोर्ट में दाखिल किया है। हाईकोर्ट ने थरियांव पुलिस को प्रमाण पत्र जांचने के लिए भेजा है। सीओ रामप्रकाश ने बताया कि कामता प्रसाद व सूरजबली की संपत्ति कुर्क की गई है। धर्मराज की मौत की जांच के बाद कार्रवाई होगी।
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