संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। वर्ष 2017 से अपहृत रामशरण द्विवेदी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में तीसरी बार दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर (हैवियस कॉर्पस) पर 23 फरवरी को सुनवाई है। इस बार पुलिस ने रामशरण की नई फोटो के साथ सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रयास कर रही है। प्रकरण में 22 सितंबर 2025 को तत्कालीन एडीजी संजीव गुप्ता व एसपी अनूप कुमार सिंह को हाईकोर्ट ने तलब किया है।
कानपुर नगर जिले के साढ़ थाना क्षेत्र के महोलिया गांव के रहने वाले रामशरण द्विवेदी मंझिले भाई कौशल किशोर कस्बा जहानाबाद के ठकुरनगली स्थित मकान में रहते थे। उनके बड़े भाई राम नारायण कानपुर में रहते हैं। जहानाबाद पुलिस ने पांच अप्रैल 2016 को राम शरण द्विवेदी सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया था। उनके कमरे से हाथी दांत, एक पुलिस का वायरलेस सेट, बारहसिंघा की सींग सहित अन्य सामान पुलिस ने बरामद किया था।
उन्हें जेल भेजकर कमरे में ताला बंद कर दिया था। परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट इलाहाबाद की शरण ली थी।
चार अप्रैल 2017 को रामशरण द्विवेदी जेल से छूटकर घर पहुंचे। कमरे में पुलिस का ताला बंद था। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने कमरे का ताला खोला। कमरे से सामान गायब था। पुलिस प्रताड़ना की वजह से रामशरण जहानाबाद छोड़कर कानपुर चले गए थे।
इसके बाद रामशरण चार दिसंबर 2017 को अपने अधिवक्ता के साथ शहर कचहरी बाइक से जा रहे थे। जहानाबाद से लापता हो गए थे। तत्कालीन थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार समेत आठ पुलिस कर्मियों के खिलाफ अपहरण का मामला 2018 में जहानाबाद पुलिस ने दर्ज किया था।
जिसके बाद से रामशरण का पता नहीं लग सका है। रामशरण की खोज में एसआईटी गठित है। एसआईटी सितंबर 2025 से रामशरण की तलाश में जुटी है। अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। पुलिस को तलाश के दौरान रामशरण की एक और फोटो मिली है जिसमें रामशरण बुजुर्ग नजर आ रहा है। उसकी उम्र करीब 63 वर्ष आंकी जा रही है।
एसआईटी प्रभारी सीओ दुर्गेश दीप ने बताया कि 23 फरवरी को हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के मामले में सुनवाई है। पुलिस हाईकोर्ट में अपने प्रयास और विवेचना की जानकारी देगी।