फतेहपुर। महानगरों से पलायन बदस्तूर जारी है। मंगलवार की सुबह भी शहर की सड़कों पर बाहर से लोग दिखाई दिए। यह दीगर रहा की झुंड की बजाय एक और दो की संख्या में इनकी चहलकदमी दिखाई दी। ये लोग कभी पैदल चलकर तो कभी वाहन में सवार होकर मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। अगर ये पुलिस और प्रशासन से आंख चुराते दिखाई दिए तो उसकी भी अपनी वजह रही।
किसी के फैक्ट्री मालिक ने बंदी के दिनों में किराया न देने की बात कहकर हाथ खड़े कर लिए तो किसी के मकान मालिक ने भोजन की व्यवस्था करने में असमर्थता जता दी। इन सबके बीच कई ऐसे भी लोग सामने आए जिनका ऐसी घड़ी में निकलना निहायत जरूरी है।
असोथर ब्लाक के जागेश्वर धाम के पास धारा हरी गांव की रहने वाली शिव प्यारी का इकलौता बेटा धनंजय 7 महीने पहले काम करने के लिए हरियाणा गया था। होली पर घर लौटा तो पड़ोस के बाबूराम ने भी साथ में चलने की इच्छा जाहिर की। होली के बाद दोनों हरियाणा चले गए। लॉकडाउन शुरू होने के बाद घर में अकेली मां की चिंता सवार हो गई।
मोबाइल पर मां की आवाज सुनने के बाद बेटे से रहा नहीं गया। बेटा विचलित हुआ तो पड़ोसी का दिल भी पसीज गया। बाबूराम ने बताया कि उसने 2 दिन ही उसने काम किया था तभी धनंजय की मां का फोन आ गया था। वह विचलित था। इसी बीच लॉकडाउन में फैक्ट्री बंद कर दी गई।
धनंजय ने बताया कि हरियाणा से दिल्ली तक दोनों पैदल आए। यहां से जैसे-तैसे ट्रक वाले को हजार हजार रुपए देकर मंगलवार की सुबह 4:00 बजे बाईपास पर उतरे। पुलिस से बचते बचाते दोनों यहां तक आ सके हैं।