फतेहपुर। युवाओं को नौकरी का झांसा और सामूहिक रूप से युवाओं का धर्मांतरण कराने की कोशिश के मामले में मकान मालिक पर पुलिस और प्रशासन की नजरें टिक गईं हैं।
उसे पूरे मामले का साजिशकर्ता माना जा रहा है। उसकेसभी ठिकानों पर छापे मारे जा रहें हैं। फरार आरोपियों की तलाश में भी दबिश दी जा रही है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के कई इलाकों में नौकरी के लालच में आने वाले लड़कों को रखा जाता है। इनमें तुराबअली का पुरवा के रहने वाले मकान मालिक अलीम को भी पुलिस ने जेल भेजा है।
अलीम के तुराबअली का पुरवा में ही दो आलीशान मकान हैं। हर मकान में करीब 20 से 30 लड़के रहते हैं। इन लड़कों की जानकारी कभी भी पुलिस को मकान मालिक की ओर से नहीं दी गई है।
पुलिस का मानना है कि मकान मालिक साजिशकर्ता है। वह लड़कों को बंधक बनाकर रखता था। नियम के मुताबिक किरायेदारों के बारे में पुलिस को जानकारी देनी चाहिए। पुलिस ने अलीम से लड़कों के सत्यापन संबंधी कागजात पूछताछ में मांगे, लेकिन वह नहीं दिखा सका है।
उसका पुलिस प्रशासन के सहयोग से मकान भी सीज कर सकती है। वहीं कोतवाल अमित मिश्रा की टीम फरार नामजद आरोपियों की तलाश में छापामारी कर रही है। टीम ने लखनऊ बाईपास, तुराबअली का पुरवा, पक्का तालाब, मसवानी समेत कई इलाकों में छापामारी की है।
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इस तरह खुला मामला
खुलासे में भाजपा युवा मोर्चा महामंत्री प्रसून तिवारी की भी भूमिका अहम रही है। प्रसून के मुताबिक बंधक युवाओं में सुधांशू ने अपने घर से मदद मांगी थी। उसने परिजनों को बंधक बनाने और धर्मांतरण की कोशिश कराए जाने की आपबीती बताई। किसी के माध्यम से सुधांशु के परिवार ने मोहनलालगंज सांसद केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर से संपर्क किया। उन्होंने फतेहपुर आवास विकास में रहने वाले अपने प्रतिनिधि अंशू सिंह सेंगर को मामला देखने को बोला। अंशू युवा मोर्चा महामंत्री के संपर्क में आए। इसके बाद प्रकरण की एसपी, एएसपी को जानकारी दी गई। इधर, सरगना एकलाख को खबर लग गई। पुलिस के रविवार शाम पहुंचने से पहले उसने सुधांशु को छिपा दिया और उसका फोन भी बंद करा दिया।
पुलिस सुधांशू की भेजी लोकेशन पर खोजबीन कर लौट गई। उसके बाद एकलाख के गुर्गों ने सुधांशु को ई रिक्शे में बैठाकर वाराणसी भेजने के लिए बस अड्डे छोड़ा। तभी सुधांशु ने प्रसून और पुलिस से संपर्क किया। सुधांशू ने बताया कि उसके मामा ने किसी मुस्लिम दोस्त से नौकरी के संबंध में बात की थी। तभी रहमान का फोन उसके पास नौकरी के लिए आया था।