सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए जरूरतमंद भटक रहे हैं। कभी अधिकारी नहीं मिलते हैं, तो कभी विभागीय बाबुओं की मनमानी से लाभार्थी लौटने को बाध्य हैं। आज नहीं, कल आने की बात कह करके आए दिन लौटाए जाने वाले जरूरतमंद हताश और निराश हैं।
अमर उजाला ने गुरुवार को समाज कल्याण विभाग का हाल लिया। दोपहर बारह बजे के आसपास इस विभाग के दफ्तर के बाहर दो दर्जन के पास जरूरतमंद जमा थे। गोधरौली गांव से आए विकलांग राम शंकर दफ्तर पहुंचे तो उनकी स्थिति पर तरस खाने के बजाय उम्रदराज की बात की अनसुनी की गई। ऐसे में यह वृद्ध निराश हो गया। हताश होकर दफ्तर छोड़ने वाले विकलांग ने बताया कि वृद्धावस्था पेंशन का पात्र होने के बावजूद विभागीय बाबू सीधे मुह बात नहंीं करते हैं। इसी गांव से आई निर्मला ने समाजवादी पेंशन के लिए आवेदन कर रखा है। पहले इस महिला को महामाया पेंशन मिलती थी। उक्त महिला ने बताया कि कंप्यूटर में नाम फीड होने के बावजूद टकराया जा रहा है। समाजवादी पेंशन के लिए ही आई शहर की शकीला नाम की महिला ने बताया कि विभाग के बाबू मनमानी पर उतारू है। अधिकारी से मिलने का कई बार प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। आज उसे अधिकारी के सीएम के दौरे में जाने की बात कह करके बैरंग किया जा रहा है। देखा जाए तो यह दो बानगी भर हैं। हकीकत यह है कि इस दफ्तर में आने वाले ज्यादातर पात्रों को सरकारी लाभ के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। लंबी दूरी नाप करके आने वाले इन जरूरतमंदों की जेबें ढीली हो रही है।