बता दें कि सीएचसी में भर्ती होने वाले रोगियों के तीमारदारों को वार्डों में या फिर खुले में रात गुजारनी पड़ती थी। वार्डों में रहने से तीमारदारों के भी संक्रमण की गिरफ्त में आने की आशंका बनी रहती है। कुछ तीमारदार सीएचसी के आसपास रहने वाले परिचितों के यहां रुक कर रोगी का इलाज कराने को विवश होते हैं। परेशानियों को ध्यान में रखते हुए शासन ने रोगी आश्रय स्थल बनवाने का निर्णय लिया है। रोगी आश्रय स्थल बन जाने से सीएचसी में भर्ती मरीजों के तीमारदारों की यह समस्या हल हो जाएगी।
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सीएचसी हुसैनगंज, जहानाबाद और हथगाम में होगा निर्माण
रोगी आश्रय स्थल निर्माण को लेकर संयुक्त सचिव राम नगीना मिश्र की ओर से सीएमओ विनय कुमार के पास इस बारे में पत्र आ गया है। सीएमओ ने बताया कि सीएचसी हुसैनगंज, सीएचसी जहानाबाद और सीएचसी हथगाम में रोगी आश्रय स्थल बनना है।
अब लागत पुनरीक्षित की गई
एक रोगी आश्रय स्थल के निर्माण में करीब 22.28 लाख की लागत का प्रस्ताव था। इस तरह तीन सीएचसी के लिए जिले में 74.93 लाख रुपये मंजूर हुए थे। अब लागत पुनरीक्षित कर दी गई है। हर सीएचसी को उनकी अंतर राशि दो लाख 70 हजार रुपये मंजूर हुआ है। पहले तीनों की कुल लागत 66.84 रुपये रखी गई थी जो अब बढ़कर 74.94 रुपये हो गई है। अंतर राशि आठ लाख दस हजार रुपये मंजूर हुआ है।
पैकफेड संस्था की होगी जवाबदेही
यह कार्य पैकफेड संस्था यानी पीएफएडी को सौंपा गया है। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि अब भविष्य में इसकी लागत नहीं बढ़ेगी। कार्य पूरा कराने के लिए कार्यदायी संस्था को पूरी तरह जवाबदेह बनाया गया है। दूसरी ओर हुसैनगंज प्रतिनिधि का कहना है कि उनके यहां डेढ़ साल से काम ठप था। लोगाें को अब आस जगी है।
ये होंगी सुविधाएं
रोगी आश्रय कक्ष वेंटीलेटेड होगा। तीमारदारों को रसोई की सुविधा मिलेगी। संयुक्त शौचालय होंगे। बाथरूम का होगा निर्माण। कक्ष में उचित प्रकाश की व्यवस्था व पंखे लगेंगे। तीमारदारों को तख्त भी मिलेंगे
गुणवत्ता परखेगा विभाग
सीएचसी में रोगी आश्रय स्थलों की गुणवत्ता स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी परखेंगे। इसके लिए विभाग तकनीकी कर्मचारियों को लगाएगा। निर्धारित समय सीमा में निर्माण पूरा होने के बाद विभाग तभी उसे हैंडओवर करेगा, जब भवन तकनीकी रूप से गुणवत्ता परक होगा। भवन की डिजाइन बिना शासन की अनुमति के नहीं बदली जा सकेगी।