गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से उसका असर गुरुवार रात पांडु नदी पर आ गया। उफनाई गंगा ने पांडु नदी की धारा मोड़ने के लिए बने बंधे को बहा दिया। इससे औंग क्षेत्र में जाढ़े का पुरवा, बिंदकी फार्म और बेनी खेड़ा गांव के किसानों की सैकड़ों बीघा तिलहन फसलें डूब गई हैं। दस किसानों की बोरिंग (इंजन सेट) के ऊपर से पानी बह रहा है। बाढ़ की चपेट में दो दर्जन गांव हैं। वहीं बेनी खेड़ा गांव का जिले से संपर्क टूट गया है। प्रशासन ने बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए हैं। दूसरी ओर यमुना नदी का जलस्तर तीन दिन से थमा हुआ है।
जिले में पहाड़ों की बारिश का असर गंगा नदी में दिख रहा है। चार दिन से लगातार नदी का पानी बढ़ रहा है। गुरुवार रात अचानक गंगा नदी की धारा ने पांडु नदी को अपने में समाहित कर लिया। इससे औंग क्षेत्र के किसानों में दहशत फैल गई है।
औंग प्रतिनिधि के मुताबिक मई में अचानक पांडु नदी ने अपनी धारा बदल दी थी, इससे कई गांवों की खेती योग्य भूमि कटान में समा गई थी। गांव भी डूबने का खतरा होने लगा था। तब कटान को रोकने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के ओएसडी रहे रामऔतार मित्तल ने यहां खुद की पहल पर बांध का निर्माण कराकर नदी की धारा पुन: पुरानी दिशा की ओर मोड़ दिया था। इससे खतरा टल गया था। अब गंगा में आई बाढ़ ने पांडु नदी के बंधा को बहा दिया है। पांडु नदी उफना गई है। बेनीखेड़ा गांव नए और पुरानी धारा के बीच में होने की वजह से वहां के लोगों का जिले से संपर्क टूट गया है, यहां के ग्रामीणों को सिकठिया (कानपुर) होकर जाना पड़ रहा है।
बाढ़ से प्रभावित किसान:- योगेंद्र, रामऔतार, रामपाल, बागीश, राजकुमार, पप्पू, रामदास, बैजनाथ, कैलाश, रामधनी, नागेश्वर समेत अन्य कई किसानों की बाढ़ से फसलें डूब गई हैं। इसमें इंजन बोरिंग (निजी नलकूप) के ऊपर से पानी बह रहा है।
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पांडु नदी के तटवर्ती गांव :- भयपुर, आशापुर, गलाथा, नयापुरवा, दरियापुर, बागंर, कटरी, बेनीखेड़ा, जाडे़ का पुरवा, बंबुरीखेड़ा, बड़ाखेड़ा, मल्हूखेड़ा, चंदनहा, कालीकुंडी, बेरी नारी, रामघाट, कलकत्ता फार्म , बिंदकी फार्म, रानीपुर, अवसेरीखेड़ा आदि हैं।
बाढ़ चौकियां अलर्ट :- एसडीएम जेएन सचान ने बताया कि बाढ़ चौकियाें पर तैनात कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गय है। लेखपाल व कानूनगो को क्षेत्र में रह कर हर दिन की रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।