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पंचायत चुनाव में 24852 प्रत्याशी आजमाएंगे भाग्य

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फतेहपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में रविवार को नाम वापसी के बाद चुनाव मैदान में डटे प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए गए। जिले के 13 ब्लॉकों में जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्यों के कुल 12,569 पदों पर 24, 852 प्रत्याशी भाग्य आजमाएंगे। ग्राम सदस्य पद के लिए सबसे कम प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
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जिला पंचायत सदस्य की 46 सीटों पर 74 प्रत्याशियों की नाम वापसी के बाद अब 833 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं। राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह के पुत्र आदित्य सिंह ने बिना कलक्ट्रेट आए ही अपना नाम वापस ले लिया। ग्राम प्रधान पद की 834 सीटों पर 9034 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं ग्राम पंचायत सदस्य पद की 10,554 सीटों पर 8,813 प्रत्याशियों ने नामांकन किया। ग्राम पंचायत के तीन हजार से अधिक वार्डों में नामांकन ही नहीं हुए हैं। वहीं क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के 1134 वार्ड में 6172 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे।
फतेहपुर। पंचायत चुनाव में सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने भले ही अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन पर रोक लगा रखी हो लेकिन प्रत्याशी इन्हीं चुनाव निशानों पर वोट मांगेंगे। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी समर में शेष बचे उम्मीदवारों को रविवार को चुनाव चिह्न आवंटित किए गए। किसी को तोप, त्रिशूल आदि मिला है तो किसी को रिक्शा, कार और गले का हार चिह्न दिया गया है। चुनाव चिह्न मिलते ही प्रत्याशी जोर-शोर से प्रचार में जुट गए हैं।
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तीसरे चरण में 26 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए 13 व 15 अप्रैल को नामांकन हुआ था। नामांकन पत्रों की जांच के बाद रविवार को नाम वापसी हुई। चुनाव मैदान में शेष बचे प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य व ग्राम पंचायत सदस्य के उम्मीदवारों को चिह्न आवंटित किए गए। आयोग ने इस बार प्रधान पद के लिए 75, बीडीसी पद के लिए 36 और जिला पंचायत सदस्य पद के लिए 53 चुनाव चिह्नों का विकल्प दिया है। प्रत्याशियों के नामांकन पत्र भरने के दौरान भी अपनी पसंद के चिह्न बताने का विकल्प था। नाम वापसी के बाद प्रत्याशियों की सूची प्रपत्र-13 में हिंदी वर्णमाला के अक्षरों के क्रम में तैयार करके चुनाव चिह्न आवंटित किए गए। आवंटित चिह्न का प्रतीक भी उम्मीदवारों को उपलब्ध कराया गया।
चुनाव निशान मिलते ही प्रत्याशी सीधे प्रिंटिंग प्रेस संचालकों के पास पहुंचे। पहले से तैयार प्रारूप पर नाम मुद्रित कराते हुए पोस्टर, हैंडबिल का आर्डर दिया और गांव की ओर कूच कर गए। कई दुकानदार तो पहले से ही ब्लॉक व कलक्ट्रेट के बाहर प्रत्याशियों से पोस्टर, बैनर के लिए संपर्क करते रहे।
अंगूर, केला, गुलाब का फूल, घड़ा, डमरू, नल, तंबू, बंदूक, पेंसिल, फरसा, ब्रश, ब्लैक बोर्ड, तोप, त्रिशूल, अनाज ओसाता किसान, टोकरी, ड्रम, इमली, कैमरा, कार, कोट आदि चुनाव निशान दिए गए। बीडीसी पद के लिए नारियल, पानी का जहाज, फ्रॉक, शहनाई, सरौता, आटा चक्की, तलवार, अंगूठी, दमकल गाड़ी व जिला पंचायत सदस्य पद के लिए आरी, उगता सूरज, कप प्लेट, कलम दवात, केतली, कैंची, गमला, चश्मा, छड़ी, गिटार, छाता, ट्रैक्टर, झोपड़ी आदि चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं।
कोरोना संक्रमण को लेकर शासन से जारी गाइड लाइन कलक्ट्रेट परिसर में तार-तार दिखी। जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव चिह्न आवंटन को लेकर कलक्ट्रेट परिसर में प्रत्याशियों के साथ उनके समर्थकों की भीड़ रही। कलक्ट्रेट परिसर पूरा खचाखच भरा रहा। हालांकि लोग मास्क लगाए रहे, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार दिखी।
फतेहपुर। सियासत पर संगठन भारी पड़ गया। पार्टी दिग्गजों के दबाव के चलते रविवार को राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप धुन्नी सिंह के बड़े बेटे आदित्य प्रताप सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया। उन्होंने जिला पंचायत के वार्ड-46 ऐरायां सादात से निर्दलीय के रूप में नामांकन कराया था। यह नामांकन पार्टी की मंशा के विपरीत किया गया था। दरअसल भाजपा ने इस सीट पर सेक्टर संयोजक महेश कुमार को प्रत्याशी बनाया है।
हुसैनगंज से विधायक और प्रदेश सरकार में खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप धुन्नी सिंह के बड़े बेटे आदित्य चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। हालांकि भाजपा ने उनके बेटे को टिकट न देकर पार्टी के सेक्टर संयोजक महेश कुमार को पार्टी प्रत्याशी बनाया। आदित्य ने 13 अप्रैल की सुबह ही अपना नामांकन कर दिया था। महेश कुमार नामांकन के लिए सामने ही नहीं आ रहे थे। इस मुद्दे को अमर उजाला ने 14 अप्रैल के अंक में प्रमुखता से उठाया था। नामांकन के आखिरी दिन जिला प्रभारी प्रकाश शर्मा ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए था यदि मंत्री पुत्र अपना नामांकन वापस नहीं लेते तो पार्टी मंत्री पर कार्रवाई करेगी।
जानकारी के अनुसार इस मसले में भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष मिश्र और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी आपत्ति जताई थी। इसके बाद रविवार को आदित्य का नामांकन वापस हो गया। उनकी तरफ से उनके चचेरे भाई और प्रस्तावक अमित सिंह ने अपने अधिवक्ता के साथ एडीएम न्यायिक विनीता के समक्ष प्रस्तुत होकर नामांकन वापस ले लिया।
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