धाता। क्षेत्र में धान की कटाई तेज हो गई है, लेकिन अब तक सरकारी क्रय केंद्र नहीं खुलने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसानों को मजबूरी में मोटा धान 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचना पड़ रहा है, जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2441 रुपये निर्धारित है। किसानों को उम्मीद है कि सरकारी खरीद शुरू होने से उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।
पिछले साल धाता, नरसिंहपुर, कबरहा और शाहनगर के कबरा स्थित साधन सहकारी समितियों के माध्यम से विपणन, पीसीएफ और पीसीयू के केंद्रों पर करीब 50 हजार क्विंटल धान खरीदा गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान सरकारी खरीद का लाभ नहीं उठा सके थे। इस बार कटाई शुरू होने के बाद भी क्रय केंद्र नहीं खुलने से किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
क्षेत्र में इस समय मोटा धान करीब 1700 रुपये और बासमती किस्म का धान 2200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। आरएस टन प्रजाति के धान का भाव अपेक्षाकृत बेहतर है। बाहरी व्यापारी इसे करीब 2300 रुपये प्रति क्विंटल खरीद रहे हैं। किसानों की परेशानी यह भी है कि उपज बेचने के बाद उन्हें नकद भुगतान नहीं मिल रहा है।
इस वर्ष क्षेत्र में मंसूरी धान की खेती अधिक रकबे में हुई है। ऐसे में सरकारी केंद्रों पर खरीद शुरू होने के बाद भीड़ बढ़ने की आशंका है। छोटे किसानों के लिए समस्या अधिक है। कम उपज और परिवहन के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण उन्हें दूर स्थित क्रय केंद्रों तक धान पहुंचाना मुश्किल होगा।
एसएमआई संजीव कुमार ने बताया कि धाता के आसपास क्रय केंद्र खोलने के लिए स्थान तलाशा जा रहा है। 20 से 25 अक्तूबर तक केंद्र शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
किसी ने बेचा धान, कोई कर रहा इंतजार
किसान भानुप्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने 12 बीघा खेत में पैदा हुआ धान 1700 रुपये प्रति क्विंटल बेचा है। गुमान सिंह कहते हैं कि उन्हें अपनी उपज का भाव 2200 रुपये प्रति क्विंटल मिला। किसान प्रेम ने बताया कि उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण उन्होंने अभी धान नहीं बेचा है। वह सरकारी क्रय केंद्र खुलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं किसान अनंत सिंह, संदीप सिंह, अखिलेश सिंह और किसान नेता अशोक सिंह ने मांग की है कि क्षेत्र में पांच से 10 किलोमीटर की दूरी पर सरकारी धान क्रय केंद्र खोले जाएं, ताकि छोटे किसानों को भी समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके।