फतेहपुर। भगवान विष्णु के छठवें अवतार परशुराम की जयंती शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इस बार जयंती शनिवार की शाम और अक्षय तृतीया रविवार को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया से ही त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था।
पंडित दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि भगवान परशुराम का जन्म इसी दिन हुआ था। अक्षय तृतीया का पौराणिक इतिहास महाभारत काल में भी मिलता है। जब पांडवों को 13 वर्ष का वनवास हुआ था तो ऋषि दुर्वासा उनकी कुटिया में पधारे थे। द्रोपदी के आदर सत्कार से प्रसन्न होकर ऋषि ने अक्षय पात्र प्रदान किया। उनसे कहा कि आज
अक्षय तृतीया है। आज के दिन जो भी श्रीहरि विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना करेगा, उसके घर का भंडार सदैव भरा रहेगा। उसके धन-धान्य का क्षय नहीं होगा। उसमें अक्षय वृद्धि होगी। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया तिथि का मांगलिक कार्यों के लिए विशेष महत्व है। इस तिथि को विवाह करना अच्छा माना जाता है। हालांकि इस वर्ष कोरोना महामारी की वजह से देश भर में लॉकडाउन है। ऐसे में मांगलिक कार्यों पर रोक है। अक्षय तृतीया के दिन स्वर्ण आभूषण की खरीद करना शुभ माना जाता है। इससे धन संपत्ति में अक्षय वृद्धि होती है।
ब्राह्मण कल्याण संस्थान ने 25 अप्रैल को परशुराम जयंती घरों में मनाने की अपील की है। कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। संस्थापक अध्यक्ष प्रदीप गर्ग ने कहा कि सामाजिक दूरी को देखते हुए सभी को परशुराम जयंती घरों में मनाने की जरूरत है। घरों नियमों का पालन करते हुए भगवान परशुराम को पुष्प अर्पित करें। इस मौके पर जिलाध्यक्ष उमाशंकर द्विवेदी, उमेश तिवारी, दीपचंद्र शुक्ला, निधि तिवारी, राजेश मिश्रा आदि मौजूद रहे।