फतेहपुर। लॉकडाउन से गांवों व कस्बों में दूध का कारोबार मंदा पड़ गया है। दूध के दाम कम हो गए हैं। डेयरी व होटल बंद होने से दूध की खपत नहीं हो रही है। इसका असर पशुपालकों पर पड़ा है। दूसरी ओर चूनी, चोकर की दुकानें बंद होने से उसके दाम बढ़ गए हैं।
कोरोना संक्रमण से लॉकडाउन का असर अब गांवों तक दिखाई देने लगा है। गांव के पशुपालक जो दूध बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमा लेते थे अब वही अपने पशुओं का ही खर्च दूध बेच कर नहीं निकाल पा रहे हैं। तेलियानी ब्लाक के मवइया गांव के पशुपालक अशोक कुमार ने बताया कि दोनों टाइम का करीब 18 लीटर दूध
होता है। पहले डेयरी में 45 से 50 रुपये लीटर दूध बिक जाता था। अब बिक्री बंद हो गई है। उधर, कस्बा व गांवों में प्राइवेट मिनी दूध डेयरी जो लघु उद्योग के रूप में काम करती थी, अब के मजदूर संक्रमण के डर से घर चले गए। ऐसे में मिनी दुग्ध डेरियां बंद हो गई हैं।
फतेहपुर से कानपुर को चलने वाली शटल ट्रेन के बंद होने से दूध के व्यापार से आश्रित पशुपालकों की दिक्कत बढ़ गई है। सदर और बिंदकी तहसील के पशुपालक शटल ट्रेन से दूध लेकर कानपुर बिक्री करने जाते हैं, लेकिन लॉकडाउन में ट्रेनें बंद होने से पशुपालकों का दूध कानपुर नहीं पहुंच पा रहा है। बैंक से लोन लेकर पशुपालन करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उनको बैंक का लोन जमा करने की चिंता सता रही है।
एक तरफ पशुपालकों के दूध की मांग घटने से दाम कम हो गए है, वहीं दूसरी तरफ मवेशियों का चारा, दाना और चोकर की कालाबाजारी से दुकानदारों ने रेट बढ़ा दिए हैं। ऐसी दशा में पशुपालकों को अपने पशुओं का पेट भरना मजबूरी बन गई है। इस तरह पशुपालक लॉकडाउन में दोहरी मार से जूझ रहे हैं।