एआरटीओ आफिस के सामने कुछ इस तरह से ट्रक में भर कर जाते लोग
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फतेहपुर। लॉकडाउन में घर वापसी के लिए मजदूर किसी भी तरह का खतरा मोल लेने में पीछे नहीं हट रहे हैं। लॉकडाउन के बाद घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों की दशा देखते बन रही है। जिसे जो साधन मिल रहा है उस पर सवार होकर अपने गांव पहुंचने का जोखिम उठा रहे हैं। यही वजह है कि न तो सिलेंडर से भरे डाला में बैठने पर किसी को गुरेज है और न ही ट्राला पर सफर करने से ही किसी को एतराज।
लॉकडाउन के बाद सड़कों पर पलायन की तस्वीरें ही चिंताजनक हालात बयां कर रही हैं। दिल्ली और हरियाणा से बड़ी तादाद में मजदूरों की हो रही घर वापसी जिले की सड़कों की जुबानी बनी है। अपने-अपने घरों को लौटने के लिए प्रवासी मजदूर परिवार के साथ भी जोखिम मोल ले रहे हैं। रविवार की सुबह नौ बजे लखनऊ बाईपास पर एक ट्रक रुका। ट्रक के डाला पर चार महिलाएं और तीन बच्चों के साथ पांच पुरुष सवार थे। ट्रक चंद मिनट रुकने के बाद आगे बढ़ा तो उसमें सवार एक महिला झटका लगने की वजह से संतुलन खो बैठी। गनीमत रही कि बैठी महिला ने उसका कंधा पकड़ लिया। इसी तरह से लोधीगंज बाईपास से एक सिलेंडर लगने वाला ट्रक गुजरा। बेशक, इन तस्वीरों को लापरवाही से जोड़कर देखा जा सकता है लेकिन हकीकत यही है कि सब कुछ जानने और समझने के बावजूद प्रवासी मजदूर ऐसी जोखिम भरी यात्रा करने को मजबूर हैं।