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खचाखच भर कर दिल्ली से आईं बसें

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फतेहपुर। लॉकडाउन के चलते दिल्ली और हरियाणा से घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए लगीं रोडवेज की बसों में भीड़ का रेला दिखाई दिया। रविवार को दिल्ली से दोपहर तक आठ बसें आ चुकी थीं। इनमें करीब साढ़े बारह सौ लोग थे। बांदा और प्रयागराज भेजी गईं बसों में पैर रखने की जगह नहीं थी। यही हाल दिल्ली से लौट रही बसों में भी देखने को मिला। सारी बसों मेें सामाजिक दूरी की बात बेमानी नजर आई।
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कोरोना वायरस के बाद प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए लगाई गईं रोडवेज की बसों में भीड़ का आलम रहा। जिसे साधन मिल रहा है उस पर सवार हो रहा है। जिसे नहीं मिल रहा है, वह पैदल ही गांवों की तरफ चल पड़ा है। रविवार को दिल्ली से दोपहर तक आठ बसें आ चुकी थीं। इन पचास सीटर बस में किसी में 80 यात्री सवार थे तो किसी में 90। आपाधापी का माहौल कुछ ऐसा देखा गया कि महिलाएं और बच्चों को नीचे बैठकर यात्रा को मजबूर होना पड़ा। कमोबेश यही हाल बांदा और प्रयागराज गईं रोडवेज की बस में दिखा। इन बसों के लगने के कुछ देर बाद ही चालक को बस स्टाप से गाड़ी निकालनी पड़ गई। भीड़ इतनी बढ़ गई थी कि अंदर कदम रखने को जगह नहीं थी। एक अनुमान के मुताबिक आठ बस में करीब साढ़े 12 सौ प्रवासी मजदूर सवार होकर आए। इस मामले में एआरएम ने बताया कि रविवार की सुबह बांदा और प्रयागराज के लिए मांग के अनुरूप एक-एक बस को दौड़ाया गया। 25 बसें कानपुर भी भेजी गईं। 37 बसें दिल्ली-गाजियाबाद भेजी गई थीं। इनमें से दोपहर साढ़े तीन बजे तक आठ बसें लौट चुकी हैं। साथ ही माना कि सबको जल्दी होने की वजह से सीटिंग प्लान धरा रह गया।
फतेहपुर। कोरोना के खतरे से निपटने की जारी कोशिशों के बीच 270 लोग खाड़ी देशों समेत अन्य स्थानों से लौट चुके हैं। इनमें से दो यात्रियों को शंका के आधार पर ब्लड सैंपल लेकर भेजा गया था। रिपोर्ट निगेटिव रही। 23 यात्रियों ने 28 दिन का एकांतवास पूरा कर लिया है। सेल के प्रभारी डॉ. केके श्रीवास्तव बताते हैं कि जो 50 नाम हमारे लिए चुनौती बने हैं। पासपोर्ट में दिए गए पते के आधार पर खोजबीन की जाती है। कई मोबाइल नंबर ऐसे रहे जो मिलाने पर स्वीच आफ बता रहे हैं।
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फतेहपुर। दिल्ली और गाजियाबाद से लौट रहे प्रवासी मजदूरों की जांच का काम रविवार को नऊवाबाग बाईपास पर किया गया। चिकित्सकों की टीम ने शहर की सीमा पर कदम रखने वालों की स्क्रीनिंग की। यहीं से उन्हें हरी झंडी मिलती रही। इस व्यवस्था के लागू होने से सदर अस्पताल के फीवर हेल्थ डेस्क का लोड कम रहा।
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