फतेहपुर। चैत्र अमावस्या मंगलवार को है। बुधवार से नवरात्र पर्व शुरू हो रहा है। चैत्र अमावस्या वह तिथि है जो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम तिथि भी कहलाती है। इस तिथि के बाद हिंदू नववर्ष शुरू हो जाता है। इस अमावस्या में गंगा स्नान करने के बाद श्रद्धालु नवरात्र में नौ दिन की पूजा शुरू करेंगे।
चैत्र अमावस्या विक्रम संवत वर्ष का अंतिम दिन होता है। विक्रम संवत को हिंदू कैलेंडर के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र अमावस्या तिथि की समाप्ति के बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आती है जो हिंदू वर्ष का पहला दिन होता है। कहते हैं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। नवरात्र भी हिंदू नव वर्ष की पहली तिथि से प्रारंभ होता है। पंडित दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों के दर्पण के लिए समर्पित है। इसलिए इस दिन पितरों के आत्मा की शांति के लिए उपवास रखा जाता है। खासकर जो लोग पितृ दोष से पीड़ित हैं, उनके लिए अमावस्या व्रत इस दोष के निवारण के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं अन्य माह की अमावस्या के समान चैत्र अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करना श्रेष्ठ माना गया है। ऐसा करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। अमावस्या तिथि के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं। जहां सूर्य आग्नेय तत्व को दर्शाता है तो वहीं चंद्रमा शीतलता का प्रतीक है। सूर्य के प्रभाव में आकर चंद्रमा का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए मन को एकाग्रचित करने का यह कारगर दिन होता है। इसलिए अमावस्या का दिन आध्यात्मिक चिंतन के लिए श्रेष्ठ होता है। अमावस्या को जन्म लेने वाले की कुंडली में चंद्रदोष होता है।
चैत्र अमावस्या के दिन प्रात: जल्दी उठें। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, जलाशय में स्नान करें। सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को अर्घ दें। इस दिन कर्मकांड के साथ अपने पितरों का तर्पण करें। पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें। आज के दिन जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्र का आरंभ 25 मार्च से हो रहा है। हिंदू धर्म में नवरात्र का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। इस दौरान माता के भक्त मां को प्रसन्न करने के लिए नौ दिन तक उपवास रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आश्विन और चैत्र नवरात्र में माता पृथ्वी पर आने के लिए अपने एक खास वाहन का इस्तेमाल करती हैं। माता के वाहन को देखकर ज्योतिष शास्त्र से जुड़े लोग आने वाले साल की स्थिति का आंकलन करते हैं।
मां की सवारी नाव होने का मतलब यह है कि इस साल खूब वर्षा होने वाली है। जिसकी वजह से आम लोगों का जीवन प्रभावित होने के साथ बाढ़ आदि जैसी प्राकृतिक आपदा भी आ सकती है। इसकी वजह से जन-धन को बड़ा नुकसान हो सकता है।
चैत्र नवरात्र का समापन दो अप्रैल गुरुवार को होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता की विदाई हाथी पर होने वाली है। माता का वाहन हाथी होने का मतलब है कि इस साल बारिश अच्छी होने वाली है। जो कृषि के लिहाज से बेहतर होगा। इसके अलावा नववर्ष के मंत्री चंद्रमा और राजा बुध होने का मतलब है कि आने वाला वर्ष अर्थ व्यवस्था के लिए बेहतर रहेगा।