फतेहपुर। बारिश और ओले गिरने से प्रभावित किसानों के लिए होली का पर्व बेरंग रहा। ज्यादातर किसानों ने न तो गुलाल उड़ाया और न ही घरों में पकवान बनवाए। दैवी आपदा ने छोटे-बड़े सभी किसानों की कमर तोड़ दी। बानगी के तौर पर खजुहा विकास के सिजौली गांव को लें। आंधी, बारिश के साथ ओले गिरने से राई, सरसों, चना, गेहूं की फसलें नष्ट हो गई। एक स्थान पर जुटे ग्रामीणों ने त्योहार न मनाकर फसलों के नुकसान की भरपाई को लेकर चिंतन किया।
खजुहा विकास खंड के सिजौली ग्राम पंचायत में एक सप्ताह पहले तेज आंधी, बारिश के साथ ओले गिरने से राई, सरसों, चना, गेहूं की फसलें नष्ट हो गई हैं। इस दैवी आपदा से ग्राम पंचायत के 17 मजरा भी ज्यादा प्रभावित हैं। फसलों के बर्बाद होने से रंगों का पर्व बेरंग हो गया। यहां के ज्यादातर ग्रामीण किसानों ने होली पर्व में पकवान बनाने के लिए कोई खरीदारी नहीं की और न ही किसी को रंग, गुलाल लगाया। ग्राम पंचायत के मजरा गोधईया,
तेजीपुर धीरपुर, उमरिहा, बसंतखेड़ा, खोटिला, सिजौली, बंडवा, पूरेदान, अंगदपुर गांव में यह हालात रहा। ग्रामीण राजेश सिंह ने कहा कि दैवी आपदा से फसलों में 100 फीसदी नुकसान हुआ है। लेखपाल व अन्य अधिकारी को गांव में आकर नुकसान की रिपोर्ट बनाकर लाभ दिलाना चाहिए। बकेवर के नंदू तिवारी ने बताया कि बारिश और ओलों ने छोटे-बड़े सभी किसानों की कमर तोड़ दी।
क्षेत्र के विधायक व प्रदेश सरकार में कारागार राज्यमंत्री जयकुमार सिंह जैकी ने 10 दिन में 100 फीसदी नुकसान की भरपाई का भरोसा दिलाया है। एक सप्ताह बीत गए हैं, अभी तक गांव में कोई कर्मचारी फसलों की जांच करने नहीं आया है। ग्रामीण हरिश्चंद्र सिंह ने कहा कि 10 दिन तक कोई अधिकारी, कर्मचारी गांव नहीं आता है तो तहसील और जिला मुख्यालय में जाकर अपनी आवाज उठाएंगे। फसलों का बीमा करने वाली कंपनी व दैवी आपदा राहत कोष से किसानों के नुकसान की भरपाई कराई जाए। इस मौके पर दिनेश, कप्तान सिंह, रामआसरे, सुल्लन सिंह, धीर सिंह, सुनील सविता आदि मौजूद रहे।
छह मार्च को हुई बारिश और ओलावृष्टि में सबसे ज्यादा बर्बादी बिंदकी तहसील क्षेत्र के किसानों की हुई थी। ओलावृष्टि ने गेहूं, चना और सरसों की फसल को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया। मुनाफा तो दूर किसानों की लागत पर बन आई है। किसानों को जल्द से जल्द किसान फसल बीमा और दैवी आपदा से राहत राशि समय पर दे पाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
बिंदकी तहसील क्षेत्र में आंधी, बारिश व ओलावृष्टि से नुकसान का सामना कर रहे किसानों को शीघ्र लाभ पहुंचाने के लिए मशीनरी पूरी तरह लेखपालों पर निर्भर है। बिना लेखपालों के सर्वे पूरा किए किसानों को मुआवजा मिल पाना संभव नहीं है। ऐसे में एसडीएम बिंदकी प्रह्लाद सिंह ने सभी लेखपालों को सर्वे में दिन रात काम करने के निर्देश दिए हैं।
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बारिश और ओले गिरने से विकास खंडों के प्रभावित गांवों में हुए नुकसान की अनुमानित रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी गई है। राजस्व टीम किसानों के खेत में जाकर वास्तविक आंकलन करेगी। उसकी रिपोर्ट बाद में भेजी जाएगी। बृजेश सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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ऐसे किसान जिनकी फसलों का बीमा नहीं था, उन्हें दैवी आपदा प्रबंधन के तहत सहायता दी जाएगी। जिन किसानों की फसलों का बीमा था, उन्हें दैवी आपदा और फसल बीमा योजना दोनों से सहायता मिलेगी। सर्वे पूरा होते ही हम चेकों के माध्यम से किसानों को उनके नुकसान के एवज में मुआवजे की धनराशि का भुगतान करेंगे। प्रहलाद सिंह, एसडीएम बिंदकी
नुकसान की अनुमानित रिपोर्ट
- अमौली ब्लाक 20 गांवों में गेहूं की फसल में 52 फीसदी जौ में 50 फीसदी, चना में 60 फीसदी, राई-सरसों में 70 फीसदी नुकसान।
- मलवां ब्लाक के 31 गांव में गेहूं की फसल में 55 फीसदी, चना में 45 फीसदी, राई-सरसों में 60 फीसदी नुकसान।
-देवमई ब्लाक के सात गांवों में गेहूं की फसल में 50 प्रतिशत, जौ की फसल में 45 प्रतिशत, चना में 35 प्रतिशत, राई-सरसों की फसल में 50 प्रतिशत।
- खजुहा ब्लाक के तीन ग्राम पंचायतों में गेहूं में 35, जौ में 45 और राई-सरसों की फसल में 60 प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट दी गई है।