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साहित्य के मानिंद हस्ताक्षर डॉ. कृष्ण कुमार त्रिवेदी नहीं रहे

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डा. कृष्ण कुमार त्रिवेदी - फोटो : fatehpr
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फतेहपुर। जाने माने साहित्यकार डॉ. कृष्ण कुमार त्रिवेदी का रविवार सुबह निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने न केवल कई पुस्तकों का लेखन किया, बल्कि जिले की साहित्यिक गतिविधियों को नए आयाम भी दिए। अपने व्याख्यानों से विदेश में भी जिले का नाम रोशन किया।
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गांधी दर्शन की शोध उपाधियों से विभूषित यायावरी के पर्याय, देश-विदेश के अगणित रोचक संस्मरणों से ओतप्रोत, ख्यातिलब्ध शिक्षाविद्, डॉ. कृष्ण कुमार त्रिवेदी का जन्म तीस नवंबर उन्नीस सौ चालीस में चुरियानी गांव में हुआ था। वह शहर के शादीपुर में निजी आवास में पत्नी के साथ रह रहे थे। उनके निधन पर समीक्षक व लेखक ओपी अवस्थी, शिवशरण सिंह चौहान अंशुमाली, बृजमोहन पांडेय विनीत, डॉक्टर चंद्र कुमार पांडेय, डॉ अश्वनी कुमार शुक्ल, चंद्रशेखर शुक्ल, शिवशरण बंधु हथगामी, महेश चंद त्रिपाठी, रामअवतार साहू, डॉक्टर दिनेश चंद्र शुक्ल, सुधाकर अवस्थी,डॉ बृजेंद्र अग्निहोत्री, कोटेश्वर शुक्ल, शैलेंद्र अग्निहोत्री, शैलेंद्र द्विवेदी, रविशंकर अवस्थी, प्रशांत अवस्थी, सुशील शुक्ला, उर्दू कवि जफर इकबाल जफ़र, कमर सिद्दीकी,डॉ वारिस अली अंसारी, शिवशरण आदि ने गहरी संवेदना व्यक्त की है।
अर्थों का चक्रव्यूह, श्वेत श्याम पट और मले तमाखू-से गए, कहानी- संग्रह-केंचुल और शार्ट स्टोरीज फ्रॉम इंडिया, उपन्यास-वापसी और मकान, ललित निबंध-पुराना कैलेंडर और समय के पंछी, शोध-गांधी जी का गांवों पर प्रभाव,समीक्षा- तुलसी संदर्भों में संस्मरण-साहित्य और समय और बाल-साहित्य-राष्ट्रीय अंत्याक्षरी, बड़ा मूर्ख कौन, मधुमक्खियों की वापसी एवं अफ्रीकन फोक टेल्स, संकल्प, दिशा-कल्प, नवोदित स्वर, हिंदी चेतना, अक्षर पर्व, हरिभूमि, मधुमती, मधुराक्षर, देशबंधु, आनंद रेखा, कंचनप्रभा, बदलाव का संघर्ष पथ, हाइकु भारती, हाइकु दर्पण, तृतीया, अदबी माला, मानस-चंदन, साहित्य अमृत, उत्तर प्रदेश और नूतनवाग्धारा आदि पत्र-पत्रिकाओं के लिए वह बराबर लिखते रहे। कुरुक्षेत्र से राधा के नाम पाती रचना उनकी अमर प्रेम-कविता है।
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साहित्यकार कृष्ण कुमार त्रिवेदी के इकलौते बेटे की माहभर पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। जिसके बाद से वह गुुमसुम रहते थे। रचना के मंच पर भी इसका अहसास होता था। इलाकाई जितेंद्र सिंह का कहना है कि बेटे की मौत ने साहित्यकार और महर्षि विद्या मंदिर के पूर्व प्रधानाचार्य को झकझोर दिया था।
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फोटो संख्या- 38 - फाइल फोटो
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