फतेहपुर। महज पचास हजार रुपये और बाइक के लिए पत्नी को पीटकर मार डालने, शव यमुना नदी में फेंकने के मामले में अदालत ने पूरे परिवार को दस-दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दहेज हत्या में न्याय पाने में पीड़ित परिवार को नौ साल लग गए।
बांदा जनपद के कमासिन थानाक्षेत्र के मुसीवा गांव के दंपति गंगा देवी और विजय ने बेटी ऊषा की शादी असोथर थानाक्षेत्र के जद्दू बगहा (सरकंडी) निवासी कमलेश से 30 अप्रैल 2006 में की थी। अधिवक्ता के मुताबिक शादी के कुछ दिन बाद से ही कमलेश पत्नी ऊषा पर मायके से पचास हजार रुपये और बाइक दिलाने की मांग करने लगा था। ऊषा के असमर्थता जताने पर कमलेश और उसके घरवाले मारपीट करते थे। 29 अगस्त 2011 की दोपहर
एक बजे कमलेश ने पिता सुंदर, मां सुषमा और बड़े भाई रामप्रकाश के साथ मिलकर ऊषा को पीटकर मार डाला। शाम को ही ऊषा का शव यमुना नदी में फेंक दिया। ऊषा के ही गांव में उसकी बुआ कुसुमा भी रहती थी। ऊषा के साथ ससुराल में होने वाले बर्ताव की उसे पूरी जानकारी थी। बुआ ने ही ऊषा के मायके में फोन कर घटना की जानकारी दी थी। घटना के एक सप्ताह बाद सात सितंबर को प्रकरण की एफआईआर हुई। मायके पक्ष वालों के गैर
जनपद का होने के कारण स्थानीय पुलिस ने सीधे एफआईआर नहीं लिखी। बाद में पीड़ित पक्ष के एसपी से मिलने के बाद एफआईआर लिखी गई थी। इसके बाद से प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था। शुक्रवार को प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलकांत श्रीवास्तव ने की। मृतका के परिवार को न्याय दिलाने के लिए सहायक शासकीय अधिवक्ता रहस बिहारी श्रीवास्तव ने अदालत के समक्ष गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किए।
अपर जिला जज कमलकांत श्रीवास्तव ने मृतका ऊषा के पति कमलेश, जेठ रामप्रकाश, सास सुषमा और ससुर सुंदर को दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इन सभी पर छह-छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड का भुगतान न करने पर दोषियों को तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत का फैसला आने के बाद पूरे परिवार माता-पिता और दोनों बेटों को जेल भेज दिया गया। घटना के बाद से सभी जमानत पर थे।
मुकदमे की पैरवी के दौरान ऐसी भी स्थिति आई जिसमें बीच में ही मृतका मां और मामले की वादिनी गंगा देवी ही बेटी को मारने वाले ससुरालीजनों के खिलाफ दिए बयान से मुकर गईं। हालांकि मृतका की बुआ कुसुमा अदालत के सामने डटी रही। उसकी गवाही ही मुल्जिमों को जेल की सजा दिलवाने में महत्वपूर्ण रही।
फतेहपुर। घटना में पुलिस ने भी हेरफेर किया। विवेचना तत्कालीन सीओ थरियांव जयदेव सिंह तोमर के निर्देश पर हो रही थी। इस मामले में पुलिस ने पति के अतिरिक्त सास सुषमा, ससुर सुंदर और जेठ रामप्रकाश के नाम एफआईआर की विवेचना से बाहर कर दिए थे। बाद में जब वादिनी की ओर से अदालत में अपील की गई तो कोर्ट के निर्देश पर जेठ, सास और ससुर को मुकदमे में शामिल किया गया। जिसके बाद तीनों घटना में बराबर के दोषी पाए गए और सभी को दस साल की सश्रम कारावास के भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया।