फतेहपुर। सकारात्मक सोच और कड़ी मेहनत उम्मीदों को पंख लगा देती है। यह वाक्य विकास खंड ऐरायां के बुदवन गांव के इंजीनियर विकास पांडेय पर सटीक बैठता है। नौकरी छोड़ उन्होंने बंजर हो चुकी अपनी पैतृक जमीन को पहले उपजाऊ बनाया फिर तीन साल में ही हरियाली लहलहा कर नजीर पेश की। अब खीरा, टमाटर की उपज से वह रोजाना औसतन तीन से चार हजार रुपये कमा रहे हैं।
खागा तहसील के बुदवन गांव में किसान परिवार में जन्मे विकास पांडेय ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद झारखंड के टाटा जिला में इंजीनियर की नौकरी शुरू कर दी। नौकरी में उनका मन नहीं लगा रहा था। कृषि क्षेत्र में सरकार की चलाई जा रही योजनाएं विकास पांडेय को आकर्षित करने लगीं। गांव की बंजर पड़ी जमीन को
उपजाऊ बनाने का वह सपना देखने लगे। एक साल के अंदर ही वह झारखंड से नौकरी छोड़ कर गांव लौट आए। यहां आकर पहले उन्होंने गांव किनारे की जमीन में पोल्ट्री फार्म खोला। उससे मुर्गी का व्यापार शुरू हुआ। मुनाफा हुआ और ऊसर पड़ी जमीन में पोल्ट्री फार्म से तैयार कंपोस्ट खाद का छिड़काव किया। खेतों की मेड़बंदी कराई। ऊसर पड़ी एक एकड़ जमीन में पॉली हाउस बनाया। पिछले साल विकास पांडेय ने पॉली हाउस में खीरा के फसल
की बुआई की। फरवरी से मई के महीना तक खीरा में अच्छा मुनाफा हुआ। इसके बाद सितंबर में टमाटर की नर्सरी तैयार कर पॉली हाउस में बुआई की। नवंबर से टमाटर निकलना शुरू हुए, जो खागा की मंडी में रोज बिक्री के लिए भेजे जाते हैं।
इंजीनियर से किसान बने विकास पांडेय अपने खेत की फसलों की सिंचाई में बिजली का उपयोग नहीं करते हैं। उन्होंने दो सोलर पंप लगाए हैं। सोलर पैनल के माध्यम से नलकूप चलाए जाते हैं। उससे फसल की सिंचाई करते हैं। विकास पांडेय का कहना है कि एक सोलर पंप तीन हार्स पावर व दूसरा सोलर पंप पांच हार्स पावर का लगा है। इससे बिजली के बिल की बचत होती है।
पोल्ट्री फार्म के बाद पॉली हाउस में खीरा और टमाटर की खेती कराने के बाद अब इंजीनियर से किसान बने विकास पांडेय अब मशरूम की ओर अपना रुख बना रहे हैं। उनका कहना है कि अगले सीजन में मशरूम भी कराएंगे। इसमें तीन से चार मजदूर रोज काम करेंगे।
---
फतेहपुर। विकास पांडेय ने खेती मेें मुनाफा कमाने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने का काम किया है। रासायनिक खाद से बढ़ती बीमारियों को देखते हुए उन्होंने आर्गैनिक फसल का उत्पादन शुरू किया है। वे अपनी किसी भी फसल में यूरिया, डीएपी व अन्य रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते हैं। विकास पांडेय ने बताया कि अमर रस, अमरबान जैविक दवाओं का छिड़काव किया जाता है। साथ ही गोबर की खाद खेत में डालते हैं।
फतेहपुर। पॉली हाउस में खेती करने से ओलावृष्टि व दैवी आपदा का असर नहीं होता है। इसमें बेमौसम फसलों को आसानी से तैयार किया जा सकता है। गर्मी के दिनों में सर्दी की फसलें तैयार हो जाती हैं और बारिश के दिनों में सूखा मौसम की फसल आसानी से होती हैं। पॉली हाउस हर तरह की दैवीय आपदा से फसलों को बचाने का काम करता है।
फतेहपुर। पॉली हाउस शेड बनाने में उद्यान विभाग से 50 प्रतिशत का अनुदान मिलता है। इसके लिए पहले किसानों को उद्यान विभाग के पोर्टल में अपना पंजीकरण कराना होगा। फिर किसान को शेड तैयार करना होगा। विभागीय अधिकारियों के सत्यापन के बाद किसान के खाता में अनुदान की धनराशि भेजी जाएगी। जिला उद्यान अधिकारी रामसिंह ने बताया कि विकास पांडेय ने पॉली हाउस में अनुदान का पंजीकरण कर फाइल जमा करा दी है।
खागा तहसील में महन्ना का ऊसर जंगली जानवर व डकैतों के ठिकाना के लिए पिछले कई दशक से मशहूर था। यहां की जमीन में लोगों ने खेती करना बंद कर दिया था। इससे जमीन बंजर हो गई थी। इसमें ऐरायां और हथगाम ब्लाक के गई गांवों की जमीन हैं। ऐरायां ब्लाक का बुदवन गांव भी महन्ना के ऊसर का एक हिस्सा है। डकैतों का आतंक खत्म होने के बाद भी जमीन बंजर पड़ी हुई है। कुछ किसानों ने अपनी खेती को उपजाऊ बनाने की मुहिम चला रहे हैं।