चिलचिलाती धूप और उमस को बर्दाश्त कर घर लौटते बच्चे।
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इंतहा पार कर रही गर्मी के कहर से स्कूली बच्चों को बचाने के फरमान को कई निजी स्कूल वाले नहीं मान रहे हैं। लिहाजा बच्चों को गर्मी के सितम से जूझना पड़ रहा है। घर से फ्रेेश होकर स्कूल जाने वाले बच्चे दोपहर की चिलचिलाती धूप और उमस से मुरझाए नजर आ रहे हैं।
डीएम ने 17 मई से परिषदीय स्तर के स्कूलों को बंद करने के निर्देश दे रखे हैं। एमडीएम खिलाने के गुरुवार से जरूर छूट दी गई है। चूंकि सरकारी स्कूल में ही यह व्यवस्था लागू है। लिहाजा इन स्कूलों का खुला ताला एक बार समझ मेें आता है, लेकिन निजी स्कूल में ऐसी कोई व्यवस्था लागू न होने के बावजूद कई स्कूल खोले जा रहे हैं।
बुधवार को आग उगलती गर्मी और बेतहाशा उमस से जूझते हुए निजी स्कूलों के बच्चे नजर आए। बच्चों के घर लौटते मुरझाए चेहरे इन निजी स्कूल के संचालकों को नहीं दिखाई दिए। मौसम के मिजाज को देखते हुए तमाम अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने से हाथ खड़े कर लिए। राधानगर के मनोज कहते हैं कि उनका बेटा एक कान्वेंट स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ता है।
मंगलवार को घर के अंदर घुसने से पहले गश खाकर गिर पड़ा। इसके बाद उन्होंने उसे आज स्कूल नहीं भेजा है। बेसिक शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह छुट्टी के बावजूद स्कूल खोलने वाले स्कूलों पर सख्ती करें, क्योंकि कोई भी अभिभावक स्कूल के नियम-कायदों से इतर ज्यादा दिन खड़ा नहीं रह सकता है। उधर, बीएसए विनय कुमार ने ऐसे स्कूलों को औचक निरीक्षण कराकर कार्रवाई की बात कही है।