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बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था की खुली कलई

Sat, 09 Jul 2016 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
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मामले की जांच करने पहुंचा पुलिस फोर्स। - फोटो : अमर उजाला
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जेल से पेशी पर आए बंदी सचिन वर्मा की घटना ने जेल प्रशासन व बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिस की कार्यशैली को उजागर किया है। हर मोड़ पर चूक होती रही और सचिन अपना काम करता रहा। सही मायने में जांच की जाए तो पूरे मामले में एक दो बार नहीं, बल्कि चूक दर चूक वर्दीधारियों की ही सामने आएगी। हालांकि पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने पूरे प्रकरण की रिपोर्ट खुद ही तलब कर ली है। इसके बाद कार्रवाई का चाबुक चलाने के  संकेत दिए हैं।
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चूक नंबर-1 कानपुर पेशी में ले जाने वाले पुलिसकर्मियों की लापरवाही- पुलिस का दावा है कि सचिन वर्मा 26 जून को कानपुर कोर्ट पेशी पर गया था, वहां से ही ब्लेड और डाई लेकर आया, उसके साथ पेशी के दौरान कम से कम दो पुलिस कर्मियों की अभिरक्षा रही होगी। प्रतिबंधित सामग्री उसको पुलिस के सामने ही दी गई होगी या फिर पुलिस कर्मी सोते रहे होंगे और उसने खुद जाकर खरीद ली होगी।


चूक नंबर-2- जेल में तलाशी के नाम पर फर्ज अदायगी-  जेल मैनुअल के  अनुसार सभी आने- जाने वालों की तलाशी ली जाती है। जिला कारागार में कानपुर से पेशी पर लौटने के बाद बंदी की तलाशी ली गई होगी। तब जेल पुलिस का कारनामा उजागर होता है। पुलिस की तलाशी के बावजूद कैसे ब्लेड और डाई के पाउच लेकर बंदी अंदर कैसे दाखिल हो गया था।
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चूक नंबर-3- लॉकअप में तैनात पुलिस की निगरानी-  कचहरी में लॉकअप लाए जाने वाले बंदियों को खास निगरानी में रखा जाता है। कई बार बंदियों के भागने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद  लॉकअप में बंदी ने ब्लेड और डाई के पाउच 26 जून को छिपाए थे, उसने इस्तेमाल 12 दिन बाद किया। इन दिनों को कोई छानबीन नहीं की गई। यह नहीं लॉकअप में सैकड़ा की तादाद में बंदी आते हैं। इन सभी को कंट्रोल में रखने व निगरानी पुलिस पर घटना सवाल खड़ी करती है।  



कानपुर के डी-94 गैंग का सदस्य है बंदी- फतेहपुर। कानपुर बाबूपुरवा का शातिर मुन्ना उर्फ जहीर, कर्नलगंज के मोहम्मद सलमान, झकरकटी निवासी सूरज बाल्मीक और सचिन वर्मा को पुलिस ने चौडगरा से पकड़ने का दावा किया था। सचिन वर्मा पर लूटपाट के माल को ठिकाने का आरोप रहा है। कानपुर पुलिस ने गैंग को डी-94 नाम से रजिस्टर्ड कर रखा है। कानपुर पुलिस के चौकन्ने होने पर यह लोग चौडगरा में फरवरी में किराये के कमरे पर रहते थे। वहीं से गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। शहर में टीए की पत्नी से लूट, इंजीनियर की पत्नी से चेन स्नेचिंग और बिंदकी में किसान से लूटपाट की घटनाएं पुलिस ने खोली थी।



तो पहले भी काट चुका हाथ- बंदी सचिन के हाथ में डाक्टरों ने पुराने कटे निशान देखे हैं, उन निशानों को देखकर डाक्टरों ने अंदाज लगाया है कि बंदी ने पहले भी कई बार अपने हाथ को काटा होगा।
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