फतेहपुर। जिला अस्पताल की आयुष विंग में एक महीने से मरीज इलाज व दवाओं की जगह सिर्फ परामर्श लेकर घर लौट रहे हैं। अस्पताल में दवा का स्टॉक खत्म होने से ये हालात बने हैं।
आयुष चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाएं लिखनी पड़ रही हैं। जो मरीज एलोपैथ दवाओं का सेवन करने से मना करते हैं। उन्हें मेडिकल स्टोर से आयुर्वेद, होम्योपैथिक व यूनानी की दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। जो मौजूदा हालात हैं। उन्हें देखकर नहीं लगता है कि हाल फिलहाल दवा की समस्या दूर हो सकेगी।
आयुर्वेद, होम्योपैथिक व यूनानी चिकित्सा पद्धति पर एतबार रखने वालों मरीजों के लिए जिला अस्पताल में आयुष विंग संचालित है। कोविड-19 के चलते 22 मार्च से 8 नवंबर तक अस्पताल बंद रहा।
इसके बाद अस्पताल खुला, तो रोजाना दो सौ से अधिक मरीज ओपीडी में आने लगे। तो ओपीडी में दवाओं का संकट आ गया। अस्पताल में दवा का स्टॉक खत्म होने ले देशी चिकित्सा विधा पर भरोसा रखकर दूर दराज से आने वाले रोगियों को एक माह से आयुष चिकित्सक सिर्फ परामर्श दे रहे हैं।
फतेहपुर। कोरोना की वजह से न केवल छह महीने तक आयुष विंग में ताला लटका रहा। अमूमन जून के महीने में दवाओं का स्टॉक लखनऊ से मिल जाता है। इस बार कोरोना की वजह से डिमांड नहीं गई। तो दवाओं की आपूर्ति भी नहीं हुई। इस कारण स्टॉक खाली हो गया।
कोरोना संक्रमण की वजह से समय रहते दवाओं की डिमांड नहीं भेजी जा सकी। दवाओं की उपलब्धता की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। जल्द दवा मिलने के आसार हैं। - डॉ. एसपी जौहरी, नोडल अफसर, जननी सुरक्षा योजना
देवरी गांव में प्रधान प्रतिनिधि अंशू के घर दबिस देने गई पुलिस, चचेरी बहन पूछताछ करती- फोटो : FATEHPUR