जिले में बर्बाद हुई किसानों की फसल का मुआवजा दिलाने की रिपोर्ट जिला प्रशासन ने जल्दबाजी में सही नहीं भेजी थी। अनुमानित सर्वे रिपोर्ट पूरी तरह से गलत होने पर इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गई।
तभी उनके आदेश पर अब 25 से 50 प्रतिशत तक की हुई फसल बर्बाद का भी सर्वे दोबारा शुरू कराया जा रहा है। यह बात जनता दरबार में पत्रकाराें से वार्ता करते हुए पूर्व सांसद राकेश सचान ने कही।
शनिवार को पूर्व सांसद के कार्यालय में आयोजित जनता दरबार पर किसानों की बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिलाए जाने पर लेखपालों के मौके पर जाकर सही सर्वे न करने का मुद्दा छाया रहा।
यहां पूर्व सांसद ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि पूरे जिले में 21 हजार हेक्टेयर भूमि में बोई गई दलहन व तिलहन की पचास प्रतिशत से अधिक बर्बाद हुई फसल की सर्वे रिपोर्ट अनुमानित तौर पर प्रशासन ने भेज दी थी, जिसमें 11 हजार हेक्टेयर फतेहपुर सदर तहसील, साढे़ पांच हजार हेक्टेयर बिंदकी तहसील, साढे़ चार हजार हेक्टेयर खागा तहसील की रिपोर्ट मात्र चार दिन के सर्वे में 21 फरवरी को भेजी गई, जिसमें शासन ने 18 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को भेज दी थी।
उन्हाेंने कहा कि पचास प्रतिशत से कम जिन किसानों की क्षति हुई थी और गेहूं की फसल की क्षति होने की रिपोर्ट नहीं भेजी गई थी। इस मामले पर जिले के किसानों के हालात खराब होेने व सही रिपोर्ट न भेजने की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई जिसकी पहल पर अब पुन: प्रत्येक गांव के खेतों पर जाकर लेखपाल सर्वे रिपोर्ट तैयार करके भेजेंगे।