नहर में पानी छोड़े जाने का एक पैमाना होता है। उसी आधार पर किसानों को सिंचाई का पानी मिल पाता है। कानपुर देहात और जिले में नहर में छोड़े गए पानी की माप को लेकर काफी समय से विवाद है। पिछले दिनों यह तब गहरा गया जब दोनों जिलों की माप में 350 क्यूसेक का अंतर दिखा।
शिकायत पर डीएम डॉ. वेदपति मिश्र ने सिंचाई खंड के एसई से जांच कर ठोस निर्णय लेने को कहा। इसी के बाद जिले की रामगंगा, निचली गंगा नहर के एक्सईएन व कानपुर देहात के एक्सईएन को बार्डर में पानी की माप कराने के निर्देश दिए गए। सोमवार को नहर विभाग के तीनों अधिकारी बार्डर पर माप के लिए पहुंचे।
इसमें कानपुर देहात से 1150 क्यूसेक पानी आने की माप हुई है। जिले में बने गेज यंत्र की माप में 800 क्यूसेक पानी आने की रिपोर्ट निकली। इससे बार्डर में पानी के विवाद की गुत्थी सुलझने का नाम नहीं ले रही हैं। कानपुर व जिले के अधिकारियों ने माप की रिपोर्ट एसई को भेज दी है।
रामगंगा नहर के अधिशाषी अभियंता महेंद्र सिंह ने बताया कि खरीफ की फसल में किसानों को पर्याप्त पानी दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही किसानों को उनके मन मुताबिक पानी मिलने लगेगा। इस मौके पर निचली गंगा नहर अधिशाषी अभियंता वैभव सिंह, कानपुर देहात नहर के अवर अभियंता आलोक श्रीवास्तव मौजूद रहे।