डीएम ने भ्रूणहत्या और अत्याचार से लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के लिंगानुपात में गिरावट पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि महिलाएं समाज का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कई मुद्दों पर बराबर की सहभागिता निभाती हैं। इस वजह से कन्याओं (बालिकाओं) को बचाना जरूरी है।
बेटी बचाओ अभियान को सफल बनाने की मुहिम इन्हीं आदर्श गांवों से शुरू हो सकती है। डीएम का कहना है कि नामित अफसर गांव में जाकर लड़कियों के अनुपात में लड़कों की संख्या अधिक होने की जानकारी देंगे। भ्रूण हत्या रोकने के लिए पुरुष और महिलाओं को प्रेरित करेंगे।
साथ ही ग्राम पंचायत की खुली बैठक कर ग्रामीण एक तारीख तय करेंगे। उसी तारीख पर साल में एक बार नामित टीम पर्व का आयोजन कराएगी। इसमें पूरे गांव के लोग एक साथ खुशियां मनाएंगे। खुली बैठक में ही गांव के विकास कराने की कार्ययोजना भी यह टीम तैयार करेगी यदि वहां विकास नहीं हो रहा है।
जिले के संबंधित अधिकारियों से कार्ययोजना स्वीकृत कराकर गांव का विकास कार्य होगा। ग्राम पंचायत के स्कूली बच्चे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं अभियान की रैली निकालेंगे। भ्रूणहत्या का विरोध कर गांव के लोगों को जागरूक करेंगे।