लाला बाजार में रोजा इफ्तार में हिस्सा लेते लोग
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फतेहपुर। रमजान के पहले अशरे के सात रोजे खत्म हो गए हैं। रमजान की रौनकें इस वक्त शबाब पर हैं। हर तरफ इबादतों का दौर चल रहा है। शहर में लाला बाजार में सबसे ज्यादा चहल-पहल है। यहां पर तो देर रात तक लोग जमा रहते हैं। तरावीह की नमाज के बाद लोगों की भीड़ चाय की दुकानों पर लगती है। धीरे-धीरे रमजान के साथ ईद की भी खरीदारी शुरू हो गई है।
मुकद्दस रमजान में हर मुसलमान अल्लाह की इबादत में खोया है। शाम को लाला बाजार में इफ्तारी के लिए फल और सामग्री खरीदने के लिए रोजेदारों की भीड़ लगी रहती है। दालालान की मस्जिद में तो मेले जैसा माहौल है। बड़ी संख्या में रोजेदार मस्जिद में इफ्तार भी करते हैं। इतना ही नहीं दुकानों में भी हिंदू और मुस्लिम मिलकर इफ्तार कर रहे है। लालाबाजार, बाकरगंज, मुस्लिम चौक, पीलू तले, आबूनगर, पीरनपुर, अरबपुर, पनी जैसे मुस्लिम बहुल मोहल्लों में रौनक छाई हुई है। रमजान में साहिबे हैसियत मुसलमान जकात निकलते हैं। जकात पर भी गरीबों का हक है। इसके साथ फितरा भी निकाला जा रहा है।
फितरा परिवार के हर व्यक्ति पर फर्ज है। चाहे वह बालिग हो या नाबालिग। जकात और फितरे की रकम मुस्तहक को ही देनी चाहिए। इस्लाम में जकात का अपना महत्व बताया गया है। कहा गया कि कमाई का ढाई प्रतिशत जकात निकालने वाले के माल और कारोबार में तेजी से बरकत होती है। काजी ए शहर कारी फरीदउद्दीन कादरी कहते हैं कि तरावीह और नमाज पढ़ने से बार-बार अल्लाह का जिक्र होने से इंसान की रूह पाक साफ हो जाती है। यह महीना गलतियां सुधार कर नेकी की राह चलने का है। शादीपुर में रहने वाले हाफिज मोहसिन कहते हैं कि अल्लाह के करीब ले जाने का यह महीना है। अल्लाह अपने बंदों पर हमेशा रहम करता है। उनकी तरक्की की मंजिल दिखाता है। इस खास महीने को जाया नहीं जाने दिया चाहिए।