फोटो-01-ई-रिक्शा से स्कूल जाते बच्चे। संवाद
फोटो-02-स्कूली बस में अग्निशमन यंत्र नहीं। संवाद
फोटो-03-ड्राइवर सीट पर लिखा नाम व मोबाइल नंबर पड़ा धुंधला
- 742 स्कूल वाहन पंजीकृत, 12 सौ से अधिक रहे दौड़
- आए दिन हो रही घटनाओं से नहीं ले रहे सबक
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। स्कूली वाहनों में हो रही घटनाओं के बाद स्कूल प्रबंधन वाहनों में मानक अनुसार काम नहीं कर रहा है। अभी हाल ही फूलपुर में स्कूली बस का स्टेयरिंग फेल होने से बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खंदक में चली गई। जिसमें 12 बच्चे घायल हो गए। बस की स्थिति ठीक न होना दुर्घटना का कारण बताया जा रहा है।
जिले में मानक विहीन स्कूल वाहन बच्चों को लेकर लगातार सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। आलम यह है कि हर पांचवें स्कूल वाहन में खतरे का सफर कराया जा रहा है। पंजीकृत से करीब दो गुना अधिक स्कूली वाहन चल रहे हैं। इनमें बस और वैन ही नहीं, टैंपो, ई-रिक्शा तक शामिल हैं।
सबसे बड़ा खतरा स्कूल वैन में लगी गैस किट से है। सड़क पर बड़ी संख्या में मानक विहीन वाहन गैस किट लगाकर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। कई बार वाहनों में अवैध रूप से गैस रिफलिंग करते हुए हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक और परिवहन विभाग के अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं।
जनपद में लगभग यूपी बोर्ड 409 माध्यमिक स्कूल हैं। इसमें सरकारी व निजी दोनों शामिल हैं। वहीं सीबीएसई बोर्ड के 24 और आईसीएसई बोर्ड के तीन स्कूल हैं। इन सभी स्कूलों में बड़ी संख्या में वाहन अटैच हैं। लेकिन संभागीय परिवहन कार्यालय में महज 742 स्कूली वाहन के रूप में पंजीकृत हैं। इनमें भी कई का फिटनेस खत्म हो चुका है और फायर सिलंडर भी नहीं है। इसके अलावा विद्यालयों से संबद्ध वाहनों में न तो स्कूल का नाम है और न ही कोई आपातकालीन नंबर अंकित है।
-
यह हैं स्कूल वाहन के मानक
- स्कूल वाहन का रंग सुनहरा पीला हो, उस पर दोनों ओर बीच में चार इंच मोटी नीले रंग की पट्टी हो।
- स्कूल बस में आगे-पीछे दरवाजों के अतिरिक्त दो इमरजेंसी गेट हों।
- सीटों के नीचे बैग रखने की व्यवस्था हो।
- बसों व वाहनों में स्पीड अलार्म लगा हो जिससे स्कूल संचालक को वाहन की गति का पता चल सके।
- एलपीजी वाहन में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था हो।
- पांच साल के अनुभव वाले चालकों से ही स्कूल वाहन परिचालन की अनिवार्यता।
- स्कूल वाहन में फर्स्ट-एड बाक्स की व्यवस्था हो।
जिले में हुए स्कूल वाहन हादसों पर एक नजर
केस एक- बस पलटने से पांच छात्राएं हुई थी घायल
स्कूली बस पटलने से पांच बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिसके बाद प्रशासन की ओर से स्कूली वाहनों की चेकिंग का अभियान भी चलाया गया था। यह घटना 2017 में हुई थी।
केस दो-स्कूली बस ने मासूम को कुचला मौत
शहर के रियाज कालोनी निवासी रमेश की सात वर्षीय घर के बाहर खेल रही थी। तभी वहां से गुजर रही स्कूली बस ने उसे टक्कर मार दी। जिसमें उसकी मौके पर मौत हो गई थी। यह घटना 2023 की है।
वर्जन-
समय-समय पर अभियान चलाकर ऐसे वाहन स्वामियों और चालकों के प्रति कार्रवाई भी की जाती है। स्कूली वाहनों की निगरानी के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं।
लक्ष्मीकांत, एआरटीओ