दिल्ली में कोरोना फिर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। वहां से रोजाना करीब सात सौ यात्री यहां आ रहे हैं लेकिन इन जांच के इंतजाम बस अड्डे में कहीं नजर नहीं आते।
बचाव के नाम पर रोडवेज प्रशासन बसों को सैनिटाइज कराने की बात कह रहा है। थर्मल स्कैनिंग भी बंद कर दी गई है। जबकि बसों में नजदीक बैठकर यहां तक आने वाले यह यात्री यहां भी कोरोना के वाहक बन सकते हैं।
अफसरों की लापरवाही के कारण यात्री कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच यात्रा करने को मजबूर हैं। दिल्ली में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर वहां की सरकार ने एहतियात बरतना शुरू कर दिया है, लेकिन जिले में कोरोना को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिख रही है।
फतेहपुर डिपो के अलावा कैंट, मिर्जापुर, लीडर रोड डिपो की बसें ज्वालागंज बस अड्डा से होकर ही दिल्ली रूट पर चलती हैं।
इन डिपो की पांच से छह बसें रोज दिल्ली से आती हैं और ज्वालागंज बस अड्डा में स्टापेज होता है। वहीं फतेहपुर डिपो की दो-तीन बसें रोज दिल्ली से आती हैं। बस अड्डा में न तो चालक, परिचालकों की कोरोना जांच होती है और न ही यात्रियों के लिए कोई व्यवस्था है।
दिल्ली से पूरे प्रदेश के जिलों में रोडवेज बसें रोज आती हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए डिपो की बसों को सैनिटाइज कराया जाता है। बस अड्डे में यात्रियों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक भी किया जाता है। कोरोना संक्रमण की जांच कराने के अभी प्रबंध बस अड्डे पर नहीं है। आला अधिकारियों से इस पर बात की जाएगी।
-एमएल केशरवानी, एआरएम फतेहपुर