तहसील मुख्यालय बिंदकी में मुंसिफ कोर्ट की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। बिंदकी तहसील दिवस में आए डीएम राकेश कुमार से अधिवक्ताओं ने बरातशाला में मुंसिफ कोर्ट स्थापित कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि तीन दशक पूर्व न्याय चला निर्धन से मिलने की मंशा साकार करने के लिए प्रदेश सरकार ने तहसील मुख्यालयों में मुंसिफ कोर्ट बनाने की पहल की थी। इसके तहत प्रदेश की लगभग सभी तहसीलों में मंसिफ कोर्ट की स्थापना की जा चुकी है।
जिले की खागा तहसील में भी मुंसिफ कोर्ट की स्थापना कर दी गई थी, लेकिन बिंदकी मुख्यालय में मुंसिफ कोर्ट बनाने का सपना अभी साकार नहीं हुआ है। इसके लिए यहां के अधिवक्ताओं व विभिन्न संगठनों ने कई बार आंदोलन भी किए, जिस पर केवल आश्वासन मिले।
यहां तक की कई बार तत्कालीन जिला जजों ने भूमि का सर्वे भी किया, लेकिन नतीजा अभी तक शून्य रहा है। जिलाधिकारी ने इस बाबत प्रयास का आश्वासन दिया है।
वकीलों ने कहा कि तहसील मुख्यालय के यमुना व गंगा तटवर्ती गांव के वादकारियों को न्याय पाने के लिए साठ किलोमीटर की दूरी तय कर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इसमें समय तो बर्बाद होता ही है, धन का भी अपव्यय होता है।
वादकारियों में गांव गोहरारी के जगमोहन तिवारी, गंगौली के राजकरन सिंह, मौहारी के राकेश यादव, बारा के लाखन सिंह, सुरेश शुक्ला आदि का कहना है कि यदि बिंदकी तहसील में मुंसिफ कोर्ट होती तो समय व धन दोनों बचता।