फतेहपुर। खेतों में खरपतवार नियंत्रण, मिट्टी की नमी बनाए रखने और पोषक तत्वों की रक्षा के लिए मल्चिंग एक प्रभावी तकनीक है। इसे बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की ओर से किसानों को 50 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। किसान विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत जिले को 15 हेक्टेयर क्षेत्र में मल्चिंग कराने का लक्ष्य मिला है। एक हेक्टेयर मल्चिंग में करीब 40 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें से विभाग की ओर से 20 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है।
मल्चिंग के जरिये मिट्टी को जैविक या प्लास्टिक परत से ढका जाता है। इससे भारी वर्षा के समय मिट्टी का कटाव रुकता है और सूखे के दौरान नमी संरक्षित रहती है। इस विधि से न केवल खरपतवार में कमी आती है, बल्कि मिट्टी की पोषक क्षमता भी बढ़ती है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार होता है।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक ने बताया कि जैविक मल्चिंग जैसे पुआल, घास की कतरन और सड़ी पत्तियां धीरे-धीरे गलकर मिट्टी में पोषण मिलाती हैं। इससे पौधों की जड़ों को आवश्यक नमी और पोषक तत्व मिलते हैं। इससे उनका विकास बेहतर होता है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे समय पर आवेदन करें और इस लाभकारी तकनीक को अपनाएं।
ऐसे होती है मल्चिंग
जीवित मल्च खरपतवारों को दबाते हैं। पोषक तत्वों के स्थिरीकरण के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता में सुधार करते हैं। कटाव को रोकने में सहायता करते हैं। फसलों की कटाई के बाद, जीवित मल्च को मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इससे इसकी उर्वरता और संरचना में और वृद्धि होती है।