जानलेवा बुखार से शनिवार को देवमई पीएचसी के मिर्जापुर गांव निवासी एक मासूम की मौत हो गई। गांव में कई लोग बुखार से तप रहे हैं। स्वास्थ्य टीमाें की प्रभावित गांवों में की जाने वाली कवायद नाकाफी साबित हो रही है। अब ग्रामीण नर्सिंग होम में इलाज कराने को तरजीह दी जा रही है। गौरतलब है कि दो महीने के अंदर छह लोगों की डेंगू से व 40 लोगों की मौत बुखार व डायरिया से हो चुकी है। इस तरह जिले में अभी तक मरने वालों की संख्या 46 हो गई है।
बता दें कि तहसील क्षेत्र के हर ब्लाक में संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों का हमला हो रहा है लेकिन सबसे ज्यादा रोगी खजुहा व अमौली ब्लाक के गांवों से उभर कर सामने आ रहे हैं। क्षेत्र में अब तक एक दर्जन से ज्यादा लोग बुखार से जिंदगी गंवा चुके हैं। खजुहा ब्लाक के कोरवां में चार मौतें हो चुकी हैं। दो सौ से ज्यादा लोग बीमार हैं।
शनिवार को बीमारी से होने वाली मौतों की फेहरिस्त में देवमई ब्लाक का भी नाम दर्ज हो गया। मिर्जापुर गांव के पंजतन के ढाई साल के बेटे आदिल को चार दिन से बुखार आ रहा था। शनिवार को मासूम की हालत बिगड़ गई। परिजन उसे कानपुर ले जाने की तैयारी कर रहे थे उससे पहले आदिल की सांसें थम गईं। यहीं के कम से कम पचास लोग बुखार से जूझ रहे हैं।
उधर, चार मौत का दंश झेलने वाले मुस्लिम बहुल कोरवां गांव के हालात अभी भी जस का तस बने हैं। शनिवार को खजुहा पीएचसी से डाक्टर आरके सिंह के नेतृत्व में डा. एम एस खान व डा. अजय की टीम ने 211 मरीज देख कर उन्हें दवाइयां वितरित की। डेंगू की संभावना के चलते 30 स्लाइडें भी बनाईं। इसके बावजूद ज्यादातर गांववालों का सरकारी इलाज से एतबार टूट रहा है।
सरकारी दवाइयों से फायदा न मिलने की बात को लेकर प्रधान रहीसा बानो की अगुवाई में तहसील मुख्यालय में ग्रामीणों ने दस्तक दी। एसडीएम एसपी सिंह को ज्ञापन देकर कहा कि स्वास्थ्य टीम लाल, पीली, सफेद गोलियां बांट रही है। जिससे बीमारी दूर नहीं हो रही है। जिस पर एसडीएम ने बेहतर इलाज दिलाने का भरोसा दिलाया है।