यमुना की जलधारा रोककर अवैध मौरंग खनन करने के मामले में पट्टेधारक पर रविवार रात एफआईआर दर्ज कराई गई। खदान संचालकों ने प्लेट डालकर जलधारा रोकी थी। खदान संचालक का दुस्साहस यह रहा कि खंड में 14 दिन पहले भी कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद दोबारा अवैध खनन के लिए बांध बना डाला।
अढ़ावल खंड 11 की खदान पट्टाधारक मध्यप्रदेश की रत्ना सिंह है। खदान में जलधारा रोककर अवैध खनन का जीपीएस लोकेशन सहित वीडियो खनन निदेशक रोशन जैकब तक पहुंचा। निदेशक के आदेश पर रात को ही घाट की ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) बंद कराई गई। खदान में अवैध खनन की जांच को खनन अधिकारी मिथलेश पांडेय, खनन निरीक्षक अजीत पांडेय, एसडीएम प्रमोद झा, राजस्व टीम और प्रयागराज प्रदूषण बोर्ड की संयुक्त टीम रविवार दोपहर करीब दो बजे जांच को पहुंची।
टीम ने बांध की जांच की। टीम के आने की भनक खदान संचालकों को पहले ही लग गई थी। खदान से पोकलैंड हटाकर आधा किमी दूर जंगल में छिपा दी गई। टीम की जांच में खुलासा हुआ कि धारा में प्लेट डालकर अवैध खनन हो रहा था ।
राजस्व टीम खनन क्षेत्र की पांच घंटे तक पैमाइश में जुटी रही। अनुमान लगाया जा रहा है कि पैमाइश रिपोर्ट आने के बाद फर्म पर करोड़ों का जुर्माना भी होगा। जांच के बाद खनन निरीक्षक अजीत पांडेय की ओर से अवैध खनन और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
बता दें इससे पहले तीन दिसंबर को खंड 11 के संचालकों ने नदी में बांध बनाकर अवैध खनन को अंजाम दिया था। पांच दिसंबर को एसडीएम व खनन अधिकारी ने 2 पोकलैंड मशीनें सीज की थीं। बांध तुड़वाया था। खंड 11 के खदान पट्टेधारक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कार्रवाई ठोस न होने के कारण संचालकों के हौसले बुलंद रहे। दोबारा नदी की जलधारा बांधकर अवैध खनन को अंजाम दे रहे थे। खनन अधिकारी मिथलेश पांडेय ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है। खदान की ओटीपी बंद की गई है।