फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पारा पहुंचा 47 डिग्री, आसमान से बरसी आग

Wed, 17 May 2017 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो। फतेहपुर।
विज्ञापन
छुट्टी के बाद घर लौटते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
फतेहपुर। गर्मी तो जानलेवा होती जा रही है। मंगलवार को तापमान बढ़कर 47 डिग्री सेल्सियस हो गया है। इससे तो लग रहा है कि आसमान से आग बरस रही है। ऐसे में राह चलना दूभर हो गया। लोग धूप से बचने को छांव तलाशते नजर आए। इतनी भीषण गर्मी में दोपहर को स्कूल से छुट्टी होने पर बच्चे तपते हुए घर पहुंच रहे हैं।  
विज्ञापन

 बेतहाशा गर्मी में हर कोई तौबा कर रहा है। लोग भी बहुत ही मजबूरी में ही घर से बाहर निकल रहे हैं। दोपहर में तो सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। सहालग शुरू होने के बाद भी बाजारों में सन्नाटा पसरा है। मंगलवार सबसे गर्म दिन रहा। सुबह तो जैसे तैसे कट गई, पर दोपहर शुरू होते ही आसमान से मानो अंगारे बरसने लगे। कलक्ट्रेट और दीवानी के कामकाज से दूरदराज से आए लोग अधिवक्ताओं के चैंबरों से उठने का नाम नहीं ले रहे थे। कलक्ट्रेट में स्थित बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के बंद एटीएम की ओट में बैठी तीन महिलाओं में दो चेहरा ढंककर गर्मी से बचने का प्रयास करती नजर आईं। विद्यार्थी चौराहा के पास खड़े पेड़ के नीचे कई लोग जमघट में दिखे।

 
बिजली कटौती बनी कोढ़ में खाज
फतेहपुर। एक ओर तेज गर्मी पड़ रही है तो दूसरी ओर बिजली रुला रही है। मंगलवार को सुबह सवा 10 बजे बत्ती गुल हो गई। दो घंटे बाद आपूर्ति बहाल हुई। इसके बाद पौने तीन बजे फिर बिजली काट दी गई। यह कटौती चार बजकर पांच मिनट तक रही। लिहाजा शहरी गर्मी से पसीना-पसीना होते रहे। बिजली की कटौती से पेयजल संकट भी गहरा गया। स्टैंड पोस्ट पर आश्रित परिवार खाली बाल्टी लेकर विद्युत आपूर्ति का इंतजार करते रहे।
विज्ञापन



अंकल! बहुत गर्मी है, बह रहा है पसीना
फतेहपुर। उमस भरी गर्मी और तेज धूप ने मासूम चेहरों की रौनक छीन ली है। सुबह के वक्त तरोताजा होकर स्कूल पहुंचने वाले बच्चों के चेहरे छुट्टी के बाद फक्क नजर आ रहे हैं। कंधे पर भारी-भरकम बस्ते का बोझ और शरीर से टपकने वाले पसीने से दो-चार होते बच्चे मौसम की मार से कुम्हलाए नजर आ रहे हैं। मंगलवार दोपहर साढ़े 11 बजे पीसीएफ गोदाम के पास स्थिति लिल्स बगिया स्कूल की जैसी ही घंटी लगी, क्लासरूम से बस्तों का बोझ लादे बच्चे गेट की ओर तेजी से बढ़ने लगे। क्लास वन की नव्या, गौरांग, अणिका और हर्षित की मनोदशा देखते बनी। गौरांग का चेहरा मुरझाया नजर आया तो अणिका होंठ पर खाली पानी की बोतल लगाए दिखी। दोपहर 12 बजे सिविल लाइंस के विवेकानंद बालिका इंटर कालेज के घर लौट रहे बच्चों के एक झुंड में दो छतरी के साथ दिखे। सबसे पीछे चल रहे शिवम ने कहने में देरी नहीं कि अंकल क्लास से निकलने के बाद पसीना नहीं बद हो रहा है।
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें