फतेहपुर। जिले के पंथुवा का रहने वाला मौलाना उमर गौतम 1984 में धर्म परिवर्तन कर क्षत्रिय से मुस्लिम बना। इसके बाद उसने एक हजार से ज्यादा लोगों का धर्म परिवर्तन कराया। श्याम प्रताप सिंह गौतम से बने मौलाना उमर गौतम को बुधवार को लखनऊ हाईकोर्ट में धर्मांतरण के मामले में सजा सुनाई गई है।
अदालत ने अवैध धर्म परिवर्तन के मामले में उमर को मुख्य आरोपी माना है। अलीगढ़ में पढ़ते समय कुछ मुस्लिमों से उसका संपर्क हो गया था। इसके बाद मुस्लिम धर्म से प्रभावित होकर श्याम प्रताप सिंह गौतम ने धर्म परिवर्तन कर लिया। साथियों के साथ मिलकर एक समूह बनाया। दिव्यांग, मूक-बधिर बच्चों के साथ गरीबों को लालच देकर उन्हें मुस्लिम बनाने का काम शुरू किया। रमवां के मजरे पंथुआ के क्षत्रिय परिवार में जन्मा श्याम प्रताप सिंह की अब पहचान उमर गौतम के नाम से है। परिजन उससे कोई भी सरोकार न होने की बात कहते हैं।
हिंदू रीति रिवाज से की शादी
श्याम प्रताप सिंह उर्फ उमर गौतम का जन्म 1964 को हुआ था। पिता धनराज सिंह सामाजिक रूप से मजबूत रहे। पंचायत सचिव की नौकरी करने वाले धनराज एडीओ पंचायत भी रहे। धनराज के छह बेटों में से श्याम प्रताप उर्फ उमर गौतम चौथे नंबर का है। बड़ा बेटा उदय राज प्रताप सिंह, दूसरा उदय प्रताप सिंह, तीसरा उदय नाथ सिंह, चौथा उमर उर्फ श्याम प्रताप सिंह, पांचवां श्रीनाथ सिंह हैं। छठे पुत्र ध्रुव प्रताप सिंह का निधन हो गया है। पंथुआ में ठाकुर, यादव, दलित, मौर्य और कुछ अन्य पिछड़ी जातियों के लोग रहते हैं। गांव में मुसलमानों का एक भी घर नहीं है। उमर की आठवीं तक की पढ़ाई पड़ोसी गांव रमवां के सुभाष जूनियर हाईस्कूल में हुई। इसके बाद सर्वोदय इंटर काॅलेज से इंटरमीडिएट किया। शादी क्षत्रिय परिवार में राजेश्वरी से हुई, लेकिन उमर आगे की पढ़ाई करने के लिए पंतनगर चला गया और फिर एग्रीकल्चर से बीएससी करने लगा। अलीगढ़ में उमर किसी मुस्लिम महिला के संपर्क में आया। उसके उसे धर्म परिवर्तन और प्रोफेसर बनने का लालच दिया गया। वह पत्नी राजेश्वरी उर्फ रजिया के साथ दिल्ली में रहता था। उसके दो बेटे होने की भी चर्चा है।
मुस्लिम वेशभूषा में देख चौके थे ग्रामीण
श्याम प्रताप सिंह गौतम मुस्लिम धर्म स्वीकार करने के बाद मुस्लिम वेशभूषा में गांव आया था। वेशभूषा देख ग्रामीण चौंक गए थे। घर परिवार के लोगों ने उसे बहुत समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। शहर के रहने वाले उसके ससुर ने भी उसे समझाते हुए एक ईंट भट्ठा खोलने के बात कही। इस पर भी वह तैयार नहीं हुआ। उमर गौतम के पिता धनराज सिंह और परिजनों ने उसे संपत्ति से बेदखल कर दिया है।
माता, पिता की मौत पर आया गांव
श्याम उर्फ मौलाना उमर गौतम घर से बेदखल होने के बाद अपने गांव नहीं आया। साल 2021 दिल्ली से उमर की गिरफ्तारी के बाद गांव में एटीएस की टीम आई थी। धर्म परिवर्तन के बाद परिवार से उसका कोई रिश्ता नहीं है। मां के मरने पर वह गांव आया था। पिता धनराज सिंह की मौत पर भी गांव आया था। करीब वह 30 मिनट रुककर चला गया था।
एक काॅलेज में उमर के आने जाने की पुष्टि
मौलाना उमर शहर के प्रतिष्ठित इंटर कॉलेज में भी आने जाने की चर्चा है। लखनऊ रोड पर बने इस विद्यालय में कई बार मौलाना उमर आ चुका है। अपनी तकरीर के माध्यम से उसने लोगों तक अपनी बात पहुंचाई थी। बाद में इस विद्यालय की भी एटीएस ने जांच की थी, जिसमें इसकी पुष्टि हो चुकी है।
एक भाई की आर्थिक मदद की थी
लोगों में चर्चा है कि मौलाना उमर ने एक भाई को मकान बनाने के लिए उसने मोटी रकम दी थी। लोगों में चर्चा है कि बीच-बीच में वह अपने भाई को आर्थिक मदद देता रहता था। भाई भी मदद लेकर अपना काम करता रहता है। जांच में इसका खुलासा हो सकता है।