मोहर्रम की सातवीं तारीख को इमाम हुसैन की शहादत पर बुधवार को युवाओं ने लहू बहाया। कदीमी रास्तों से गुजरे अकीदतमंदों के हुजूम के बीच इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की मौत को याद कर मातम मनाया गया।
सैय्यद बाड़ा व अमरजई से उठे तीन पलंगों का मिलाप दोपहर में पीलू तले में होने के बाद सैय्यद बाड़ा के दो पलंग को छोड़ने के लिए अमरजई का पलंग साथ गया। रात नौ बजे दोनों पलंग छोड़ करके तीसरा पलंग भी यथा जगह पहुंच गया।
मोहर्रम पर्व इमाम हुसैन की शहादत के लिए जाना जाता है। मोहर्रम की सातवीं तारीख को दोपहर 12 बजे सैय्यद बाड़ा के मुस्लिम इंटर कालेज के समीप से पलंग एक व दो उठे। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने शिरकत की।
दोनों पलंग कदीमी रास्तों से होते हुए पीलू तले चौराहा पहुंचे। अमरजई मोहल्ले के लल्लू मियां की कोठी के पास से उठे पलंग तीन से मिलाप हुआ। इस दौरान मातमी माहौल देखते बना। मुस्लिम युवाओं ने हुसैन की शहादत को याद कर शरीर को लहुलूहान कर मातम मनाया।
दोपहर दो बजे मिलाप कार्यक्रम के बाद सैय्यद बाड़ा के दोनों पलंग वाया लाला बाजार होते हुए रात नौ बजे सैय्यद बाड़ा पहुंचे। दोनों पलंगों को सैय्यद बाड़ा में रुखसत करने के बाद अमरजई का पलंग भी यथास्थान पर पहुंच गया। चौधरी साबिर ने बताया कि आठवीं तारीख को कोई पलंग नहीं उठेगा