जिले में खुला थ्री लेबल का ट्रामा सेंटर फिलहाल ड्रामा सेंटर बनकर रह गया है। यहां की सेवाएं मरीजों के साथ सिर्फ मजाक है। अभी तक स्टाफ का पता नहीं है और न ही बेहतर मशीनें ही उपलब्ध हो सकी हैं। ऐसे में गंभीर रोगियों को बेहतर सुविधाओं के नाम पर यहां लाना खतरे से खाली नहीं है।
भले ही जिले मेें अब स्वास्थ्य सेवाओं का कद बढ़ रहा है। महंगी 150 जांचें मुफ्त हो रही हैं। कुपोषित बच्चों के लिए पोषण पुर्नवास केंद्र खुल चुका है। फिजियोथैरिपी विभाग भी लगभग पूरा है। इसके बावजूद एक करोड़ 98 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार ट्रामा सेंटर को लेकर संजोएं गए ख्वाब हवा में तैर रहे हैं। हकीकत में यह सेंटर छलावा साबित हो रहा है।
दो अप्रैल को डीएम राजीव रौतेला ने औपचारिक उद्घाटन करने के बाद जल्द मानव संसाधन के साथ मशीनों व जरूरत की चीजों की व्यवस्था कराए जाने की बात कही थी। इसके बावजूद यह ट्रामा सेंटर व्यवस्थाओं से खाली है। रविवार को हथगाम थाना के अकरबरपुर चिरई गांव में हो रहे निकाह के दौरान रायफल की गोली से घायल युवक मोहम्मद अबू फराज को एंबुलेंस से ट्रामा सेंटर लाया गया।
इलाज के लिए यहां पर केवल एक ऑर्थो सर्जन मौजूद थे। लिहाजा उन्होंने गनशाट के इस केस को कानपुर रेफर कर दिया। ऐसा ही कई और गंभीर लोगाें के साथ हुआ है। सीएमएस डॉ. एके मिश्रा कहते हैं कि रेगुलर स्टाफ की भर्ती होनी है। इसके अलावा मशीनी उपकरण भी आने हैं। उम्मीद है कि जल्द स्टाफ और मशीनें उपलब्ध हो जाएंगी।
ट्रामा सेंटर में जरूरत है
दो जनरल सर्जन, दो एनेस्थेटिक, तीन ईएमओ, पंद्रह स्टाफ नर्स, दो ओटी टेक्नीशियन, दो एक्सरे टेक्नीशियन, दो
लैब टेक्नीशियन, नौ नर्सिंग अटेंडेंट और नौ मल्टी टास्क वर्कर।
500 एमवीए की एक्सरे मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीन, वेंटीलेटर, डिफिब्रीलेटर, बेहोशी की मशीन, गैस मशीन, आपरेशन टेबल आदि।
सिटी स्कैन के लिए बाहर जाना होगा
न्यूरो सर्जन भी नहीं उपलब्ध होगा
मैगनेटिक रेजोनेंस इमेजिन मशीन नहीं मिलेगी