फतेहपुर। कोरोना वायरस को भगाने के लिए सामाजिक सहभागिता देखते ही बनी। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा, मोहल्ले की दुकानों से लेकर बाजार तक बंद रहे। ज्यादातर मेडिकल स्टोर वालों ने भी दुकान नहीं खोली। बस, ट्रेन, डग्गामार सभी के पहिए थमे रहे। हर किसी की जुबां से एक ही शब्द निकलता रहा कि आज से पहले कभी ऐसा दौर नहीं देखा। शहर से लेकर गांव तक सन्नाटा था। शहरों की भागभागम जिंदगी से सीधे जुडे रास्तों पर इक्का-दुक्का लोगों की चहलकदमी थी। पांच बजते ही घरों की छत व बालकनी में थालियों संग शंखनाद गूंजने लगा।
नहीं निकले मानिँग वॉकर, चौराहे भी खाली
पीएम नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू आह्वान ने मिसाल पेश की। यह ऐसा मौका रहा जब सभी ने एक दिन के 14 घंटे घरों में रहने की बात पर हंसते हंसते समझौता कर लिया। मानिँग वॉकर भी सड़कों पर गिनेचुने दिखे। सात बजते-बजते तो कर्फ्यू लग गया। सारा दिन हाईवे, जीटीरोड सभी जगह सन्नाटा छाया रहा। शहर के नामचीन ज्वालागंज, वर्मा तिराहा, राधा नगर चौराहा, पटेल नगर चौराहा, पत्थरकटा चौराहा के साथ जिला अस्पताल का तिराहा भी सन्नाटे में रहा।
प्लेटफार्म में सन्नाटा, बस अड्डा भी वैसा ही
परिवहन सेवा पर विराम लगा रहा। पहले से ही इसकी जानकारी होने से जरूरी लोग ही वाहन तलाशते दिखे। रेलवे स्टेशन के बाहर सुबह सात बजे एक भी ई रिक्शा नहीं था और न ही इन बैठने वाला। यही स्थिति पूरे दिन रही। बस स्टॉप परिसर में खाली रोडवेज बसें खड़ी रहीं। अंदर एक पीरआडी का जवान घूम रहा था जबकि पूछताछ केंद्र खुला था।
कहीं खेला कैरम, कहीं क्रिकेट
जनता कर्फ्यू का हर उम्र अनुकरण करता नहर आया। कुछ जगह पर जरूर बच्चों को घरों के बाहर देखा गया। चौक में युवाओं की एक टोली गली में कैरम खेलती नजर आई। अशोक नगर की सर्विस लेन में क्रिकेट खेला गया। तकियातले में भी क्रिकेट खेला जाता रहा।