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लोक अदालत: एक दिन में 15 हजार से अधिक वादों का निस्तारण

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जिला विधिक सेेवा प्राधिकरण की ओर से दीवानी न्यायालय परिसर में लोक अदालत का आयोजन किया गया। जनपद न्यायाधीश ओमप्रकाश त्रिपाठी ने सरस्वती पूजन और दीप प्रज्ज्वलन करके लोग अदालत का शुभारंभ किया।
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लोक अदालत में एक दिन में 15,731 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें मोटर अधिनियम से लेकर, आपराधिक और बैंक एवं राजस्व तक के वाद शामिल रहे।
पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश विजय शंकर उपाध्याय ने 34 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया। मोटर दुर्घटना न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी डॉ. बाल मुकुंद ने मोटर दुर्घटनाओं के 16 मामलों का निस्तारण कर 75,60,000 का प्रतिकर दिलाया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की एडीजे अपर्णा त्रिपाठी ने एक आपराधिक वाद का निस्तारण करते हुए 1,54,800 रुपये अर्थदंड के रूप में जमा कराए। सिविल जज सीनियर डिवीजन आनंद मिश्र ने 22 दांडिक वादों का निस्तारण करते हुए 3,64,492 रुपये के उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किए।
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इसी क्रम में सिविल जज खागा किरन मिश्रा ने 54 दांडिक वादों का निस्तारण कर 31,500 रुपये अर्थदंड वसूला। ग्राम न्यायालय के न्यायाधिकारी बिंदकी अतुल पाल ने 38 दांडिक वादों का निस्तारण करते हुए 11,400 रुपये अर्थदंड के रूप में जमा करवाया।
राजस्व न्यायालयों ने 346 वादों, 403 शमनीय दांडिक वादों और 19 चकबंदी के वादों का निस्तारण किया गया और 11158 विविध प्रकरणों का निस्तारण किया गया। नगर पालिका परिषद ने 2336 प्रकरणों का निस्तारण किया गया और 25,70,555 रुपया का शमन शुल्क वसूला गया।
बैंकिंग संस्थानों ने भी 518 लाख रुपए कीमत के 1194 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। बीएसएनएल ने 10 प्रकरणों का निस्तारण किया गया और 18500 शुल्क वसूला गया।
इस तरह से लोक अदालत में 238 दांडिक वादों का निस्तारण कर 2,14,750 रुपयों का अर्थदंड वसूला गया। 36 भरण पोषण वाद और राजस्व के 346 वाद निस्तारित किए गए।
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इस प्रकार कुल 15,731 वादों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत के समापन पर जिला जज ओमप्रकश त्रिपाठी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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