फतेहपुर। शहर में अमृत योजना से सामुदायिक और पिंक शौचालयों में ताले लटक रहे हैं। दरअसल इन शौचालयों के रख-रखाव का जिम्मा जिस संस्था को दिया गया था, उससे अनुबंध रद्द कर दिया गया है।
नतीजतन 70 लाख की लागत से शहर के सार्वजनिक स्थानों पर बने शौचालयों में ताले बंद हैं। अब नए सिरे से सामुदायिक शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी किसी संस्था को सौंपने की तैयारी है।
शहर के सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की सुविधा के लिए 14 स्थानों पर शौचालयों का निर्माण दो साल पहले हुआ था। यह शौचालय कलक्ट्रेट, विकास भवन, पीरनपुर, राधानगर, लोनिवि डाकबंगला, तांबेश्वर मंदिर के समीप, अंदौली पुलिया, जिला अस्पताल आदि स्थानों में हैं।
शौचालयों की देखरेख का जिम्मा कानपुर की नैंसी संस्था को दिया गया था, लेकिन लापरवाही के चलते कई शौचालय पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इनमें कलक्ट्रेट के पिंक शौचालय में ताला बंद है। कलक्ट्रेट का सामुदायिक शौचालय संचालित है। इसी तरह विकास भवन का शौचालय चल रहा है। नासिरपीर चौराहे में बने शौचालय में ताला बंद है। वर्मा चौराहे का शौचालय बंद है।
कलक्ट्रेट के पिंक शौचालय में बद ताला। संवाद
कलक्ट्रेट परिसर में स्थित निर्वाचन कार्यालय के समीप बने पिंक शौचालय में ताला बंद है। बनने के बाद कुछ दिन तक नैंसी संस्था ने शौचालय चलाया, लेकिन बाद में कर्मचारी ताला बंद कर चला गया।
नासिरपीर के समीप बने शौचालय में बंद ताला। संवाद
नासिरपीर बाबा की मजार के समीप बना शौचालय बनने के बाद चालू ही नहीं हुआ। निर्माण होने के बाद से अब तक ताला बंद है। आसपास झोपड़ पट्टी में रहने वाले लोग नहर कालोनी परिसर में शौच जाते हैं।
बयान:-
कानपुर की संस्था नैंसी को शहर के सामुदायिक शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन सही काम न करने के कारण संस्था का एग्रीमेंट रद्द कर दिया गया है। क्षतिग्रस्त शौचालयों की मरम्मत कराकर दूसरी संस्था को एग्रीमेंट किया जाएगा। - राजकुमार मौर्य एडवोकेट, चेयरमैन नगर पालिका