राजकीय चर्म विद्यालय का जर्जर भवन।
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राजकीय चर्म विद्यालय का अस्तित्व संसाधनों के अभाव में समाप्त होने को है। 65 लाख बिजली का बिल बकाया होने के कारण कनेक्शन कटा हुआ है, जिससे चर्म शोधन का कार्य प्रैक्टिकल की बजाय थ्योरी में संचालित हो रहा है। इसके अलावा संचालित दो अन्य ट्रेडों में निर्धारित सीटें भी भर नहीं पाती हैं, क्योंकि प्रवेश लेने वाले बच्चों को पढ़ाने वाले प्रशिक्षकों का टोटा है। बजट के अभाव में भवन की दशकों से मरम्मत नहीं हुई है, जिससे भवन की हालत दयनीय हो चुकी है।
बिंदकी बस स्टैंड के समीप स्थित राजकीय चर्म विद्यालय में प्रमुख कार्य लेदर गुड्स एवं लेदर फुटवियर का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था थी। यह व्यवस्था शासन ने 1995 में बंद कर दी थी। वर्तमान समय में चर्म शोधन के प्रशिक्षण की व्यवस्था लागू है, लेकिन बिजली की भारी राशि बकाया होने के कारण कनेक्शन कटा हुआ है। वर्तमान में संस्थान में ट्रैक्टर मैकेनिक और सिलाई कढ़ाई के दो ट्रेड हैं। ट्रैक्टर मैकेनिक में 21 सीटें हैं, जिनमें 18 भरी हैं। इसी प्रकार सिलाई कढ़ाई में 21 सीटों के सापेक्ष सिर्फ 12 सीटें भरी हैं।
संस्थान में नियुक्त एक मात्र प्रशिक्षक रामआसरे हैं, जो 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसके बाद प्रिंसिपल, फोरमैन घनश्याम श्रीवास्तव, वरिष्ठ लिपिक शिवाकांत, स्टोरकीपर शैलेश श्रीवास्तव, सफाई कर्मचारी व पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। प्रशिक्षण की स्थिति यह है कि बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान के सहारे रहना पड़ता है। प्रिंसिपल डीपी श्रीवास्तव और फोरमैन की मदद से बच्चे प्रशिक्षण की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।
चर्म विद्यालय के प्रिंसिपल डीपी श्रीवास्तव का कहना है कि उनके यहां पर पांच प्रशिक्षकों के पद सृजित हैं। वर्तमान समय में सिर्फ एक कार्यरत है। वह भी 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। प्रशिक्षकों की कमी से प्रशिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। फोरमैन, स्टोरकीपर तकनीकी जानकार हैं। ऐसी हालत में उन्हीं की मदद से काम चलाया जा रहा है।
चर्म विद्यालय के फिर बहुरेंगे दिन- फतेहपुर। खंडहर में तब्दील राजकीय चर्म विद्यालय के दिन बहुरने वाले हैं। प्रिंसिपल ने बताया कि शासन ने नया भवन निर्माण के लिए 23 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी है। इस धनराशि से बाउंड्री और भवन दोनों का निर्माण होगा। निर्माण कार्य बहुत जल्द शुरू होने वाला है।